युवाओं से फिर विश्वासघात – मरांडी
यह नाकारा एजेंसी बंद होनी चाहिए – चंपाई सोरेन
निकम्मी सरकार पर धिक्कार – रघुबर
रांची, 09 अक्टूबर। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) के झारखंड तकनीकी एवं विशिष्ट योग्यताधारी स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा अचानक स्थगित किए जाने के फैसले ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है।
राज्य के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों बाबूलाल मरांडी, चंपाई सोरेन और रघुबर दास ने इस फैसले पर हेमंत सरकार पर तीखा हमला बोला है और इसे युवाओं के साथ विश्वासघात करार दिया है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा — “हेमंत सोरेन जी ने युवाओं के साथ फिर वही किया, जो अब तक करते आए हैं — विश्वासघात!”
उन्होंने कहा कि आज जेएसएससी की परीक्षा आयोजित होनी थी, लेकिन परीक्षा से ठीक एक दिन पहले “तकनीकी खामियों” का हवाला देकर इसे रद्द कर दिया गया।
मरांडी ने सवाल उठाया कि “क्या हेमंत जी के दिल्ली में होने की वजह से तकनीकी सेटिंग ढंग से नहीं हो पाई, या वास्तव में कोई समस्या थी?” उन्होंने कहा कि इस निर्णय से अभ्यर्थियों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह का नुकसान हुआ है।
मरांडी ने आरोप लगाया

कि हेमंत सरकार पिछले छह वर्षों से युवाओं के साथ छल करती आ रही है। “पेपर लीक कर युवाओं का करियर बर्बाद किया जा रहा है और फिर उन्हें ही आरोपी ठहराकर बेगुनाही का सबूत मांगा जा रहा है।”
मरांडी ने मांग की कि सरकार परीक्षा की खामियां तत्काल दूर करे और पारदर्शी ढंग से परीक्षा का आयोजन शीघ्र सुनिश्चित करे, साथ ही अभ्यर्थियों के परीक्षा केंद्र तक आने-जाने का यात्रा खर्च भी वहन करे।
पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने भी परीक्षा स्थगन को युवाओं के “सपनों और उम्मीदों के साथ खिलवाड़” बताया।
उन्होंने लिखा —“अगर सरकार परीक्षा लेने में सक्षम नहीं है, तो पहले सूचना देने में क्या दिक्कत थी? और अगर पहले सूचना देने में भी असमर्थ हैं, तो ऐसी नाकारा एजेंसियों को बंद कर देना चाहिए।” उन्होंने कहा कि हजारों प्रतियोगी परीक्षा केंद्रों पर पहुंच चुके थे, और ठीक एक दिन पहले परीक्षा स्थगित कर देना युवाओं की मेहनत और तैयारी के साथ अन्याय है।
रघुबर दास : पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक्स पर लिखा -“धिक्कार है झारखंड सरकार पर! रात के अंधेरे में चोरी-छिपे परीक्षा स्थगित कर एक बार फिर छात्रों के साथ धोखाधड़ी की है हेमंत सरकार ने।”
उन्होंने कहा कि छात्रों की उम्र बढ़ती जा रही है, लेकिन यह सरकार एक परीक्षा भी ईमानदारी से नहीं करा पा रही। “झारखंड के युवा इस निकम्मी सरकार को सबक सिखाएंगे।”
492 पदों के लिए होनी थी परीक्षा, अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी
गौरतलब है कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) द्वारा आयोजित यह परीक्षा 9 अक्टूबर से शुरू होनी थी।
इस परीक्षा के माध्यम से 492 पदों पर नियुक्ति की जानी थी, जिसका विज्ञापन वर्ष 2023 में जारी हुआ था। लेकिन परीक्षा से ठीक एक दिन पहले आयोग ने अचानक तकनीकी कारणों का हवाला देकर परीक्षा स्थगित कर दी।
इससे हजारों अभ्यर्थी, जो अपने परीक्षा केंद्र वाले जिलों तक पहुंच चुके थे, निराश और आक्रोशित हैं। कई अभ्यर्थियों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्होंने यात्रा और रहने का खर्च उठाया, लेकिन परीक्षा रद्द हो जाने से उन्हें मानसिक और आर्थिक दोनों झटका लगा है।युवाओं का कहना है कि बार-बार परीक्षा स्थगित होने से उनका करियर अधर में लटक गया है।
राज्य में बीते कुछ वर्षों से जेएसएससी और जेपीएससी की परीक्षाओं में बार-बार स्थगन और विवाद की घटनाएं बढ़ी हैं।
