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कोलकाता, 06 नवंबर । तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय को कलकत्ता हाई कोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। पश्चिम मेदिनीपुर के सालबनी भूमि घोटाला मामले में गिरफ्तार सुमित की जमानत याचिका पर तत्काल कोई आदेश देने से हाई कोर्ट की अवकाशकालीन खंडपीठ ने इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पूजा की छुट्टियों के बाद जब कोर्ट खुलेगा, तभी इस मामले की नियमित सुनवाई होगी।

दुर्गा पूजा और काली पूजा के मौके पर अदालत में अभी अवकाश चल रहा है। शुक्रवार को न्यायमूर्ति अरिंदम मुखर्जी की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष सुमित की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने कहा कि सुमित को फिलहाल जमानत नहीं दी जा रही है। छुट्टियां समाप्त होने के बाद आगामी 16 नवंबर को जब अदालत फिर से खुलेगी, तब नियमित पीठ उनकी याचिका पर विचार करेगी। इसका सीधा अर्थ है कि सुमित रॉय को फिलहाल जेल (न्यायिक हिरासत) में ही रहना होगा और उनका यह त्योहारी सीजन जेल की सलाखों के पीछे ही गुजरेगा।

शुक्रवार को सुमित की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर दत्त ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को पूरी तरह से राजनीतिक कारणों और द्वेष के चलते लगभग पांच साल पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया है। दूसरी ओर, राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया।

उन्होंने अदालत को बताया कि इस मामले की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और जांचकर्ताओं के हाथ लगातार कई नई और अहम जानकारियां लग रही हैं। ऐसे में यदि आरोपित को अभी जमानत मिलती है, तो जांच प्रक्रिया गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति मुखर्जी ने कहा कि वह फिलहाल इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते और नियमित पीठ ही इस पर आगे विचार करेगी।

सुमित रॉय के खिलाफ सालबनी भूमि घोटाले के अलावा कथित नौकरी (शिक्षक भर्ती) घोटाले में भी मामला दर्ज है। नौकरी घोटाले वाले मामले में उन्हें अदालत से अग्रिम जमानत मिल गई थी। हालांकि, सालबनी भूमि घोटाला मामले में जब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, तो शीर्ष अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।