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कोलकाता, 09 अक्टूबर । पश्चिम बंगाल में लंबे समय से बाधित छात्र संसद चुनावों को दोबारा शुरू करने की घोषणा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने की है। शुक्रवार को आरजी कर मेडिकल कॉलेज में संघ परिवार के छात्र संगठन ‘अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद’ (एबीवीपी) द्वारा आयोजित मेडिकल छात्रों के अखिल भारतीय सम्मेलन में मुख्यमंत्री शामिल हुए। इसी मंच से उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि पिछली तृणमूल सरकार के दौरान लंबे समय से बंद पड़े कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्र संघ चुनाव राज्य सरकार अब फिर से बहाल करने जा रही है।

सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि इस विषय पर पश्चिम बंगाल के प्रभारी एबीवीपी पर्यवेक्षक के साथ उनकी सकारात्मक चर्चा हो चुकी है। अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती दिनों को याद करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि वे सभी छात्र राजनीति की ही उपज हैं और क्लास के बीच दोस्तों के बीच खड़े होकर भाषण देते-देते ही वे आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं।

एबीवीपी नेतृत्व के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए उन्होंने यह संकेत भी दिया कि आगामी वर्ष से ही राज्यभर के परिसरों में चुनावों का बिगुल बज सकता है। उनके अनुसार, छात्र संसद चुनाव शुरू होने से राज्य के सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में राष्ट्रवादी विचारधारा और ‘वंदे मातरम्’ की गूंज सुनाई देगी।

चुनाव कराने के संदेश के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने जादवपुर विश्वविद्यालय के माहौल और तथाकथित ‘वाम-नक्सल’ खेमे पर भी तीखा हमला बोला। जादवपुर को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बताते हुए उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार इस विश्वविद्यालय को एक हजार करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दे रही है, लेकिन इसके बावजूद उसी परिसर में ‘आजादी’ या ‘कश्मीर मांगे आजादी’ जैसे अलगाववादी नारे लगाए जाते हैं, जिस पर उन्होंने गहरा असंतोष जताया।

इतिहास का हवाला देते हुए शुभेंदु ने कड़े शब्दों में कहा कि यह बात कान खोलकर सुन लेनी चाहिए कि जिस कश्मीर की धरती पर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपना बलिदान दिया था और प्राण त्यागे थे, वह कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। इस दौरान उन्होंने अतीत की राजनीतिक घटनाओं का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी कि शिक्षण संस्थानों से लेकर हर जगह राष्ट्रविरोधी ताकतों, कम्युनिस्टों और ‘दिमागी नक्सलियों’ को चुन-चुनकर चिह्नित करना और उन्हें राजनीतिक रूप से नेस्तनाबूद करना ही उनका मुख्य लक्ष्य है।