कोलकाता, 23 सितंबर। सरकारी पोषित या सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए महंगाई भत्ते को लेकर एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। राज्य सरकार ने बुधवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय को सूचित किया कि ‘ग्रांट इन एड’ यानी सहायता प्राप्त कर्मचारियों को भी उनका बकाया डीए दिया जाएगा, हालांकि इस पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया में थोड़ा समय लगेगा।
सहायता प्राप्त कर्मचारियों के बकाए डीए की मांग को लेकर शिक्षकों के एक संगठन ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा की अदालत में हो रही है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों को भी बकाया डीए का लाभ मिलेगा।
मुकदमे के दौरान शिक्षकों के संगठन ने दलील दी कि जहां एक तरफ नियमित सरकारी कर्मचारियों को उनके डीए का हिस्सा मिल रहा है, वहीं सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों के शिक्षक और कर्मचारी लगातार वंचित महसूस कर रहे हैं। राज्य सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया कि इन कर्मियों के बकाए का भुगतान भी किया जाएगा, लेकिन इसमें कुछ वक्त लगेगा।
कानूनी जानकारों का मानना है कि इस प्रकरण के दायरे में आने वाले समय में नगर पालिका के कर्मचारी भी आ सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि राज्य कर्मचारियों के डीए को लेकर कानूनी लड़ाई वर्ष 2017 से चल रही है, जो प्रशासनिक ट्रिब्यूनल से होते हुए उच्च न्यायालय और फिर उच्चतम न्यायालय तक पहुंची थी। इस वर्ष 5 फरवरी को उच्चतम न्यायालय ने अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर डीए देने का निर्देश दिया था और इसके लिए एक निगरानी समिति भी गठित की थी। इसके बाद नियमित कर्मचारियों को भुगतान की प्रक्रिया शुरू हुई और अब सहायता प्राप्त संस्थानों के कर्मियों को भी इसका लाभ मिलने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।
