नई दिल्ली, 07 सितंबर । लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को कहा कि मजबूत महिलाएं अन्य महिलाओं को सशक्त बनाने में कैसे मदद कर सकती हैं। इसके लिए उन्हें जरूरी सरकारी योजनाओं, नीतियों और कानूनों पर विचार-विमर्श करना चाहिए।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज फरीदाबाद में दो दिवसीय अखिल भारतीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का उद्घाटन के अवसर पर कही। यह कार्यक्रम “जेंडर-रिस्पॉन्सिव गवर्नेंस” (लिंग-उत्तरदायी शासन) विषय पर आधारित है। इसे फरीदाबाद के ताज सूरजकुंड रिज़ॉर्ट में राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की ओर से आयोजित किया गया। यह राष्ट्रीय कार्यशाला महिला प्रतिनिधियों की राजनीतिक क्षमताओं और नेतृत्व क्षमता को बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई एक रणनीतिक पहल है।
उन्होंने सशक्त महिलाओं से आह्वान करते हुए कहा, उन्हें ऐसी प्रभावी नीतियों, योजनाओं और विधायी उपायों पर विचार-विमर्श करना चाहिए जो अभाव और कठिनाइयों का सामना कर रही महिलाओं को आर्थिक तथा सामाजिक रूप से मजबूत कर सकें। देश की लगभग आधी आबादी वाली महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के बिना भारत एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर आगे नहीं बढ़ सकता। हर महिला के पास रोजगार, आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक सशक्तिकरण के अवसर होने चाहिए।
बिरला ने कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान ऐतिहासिक आवश्यकता है। विभिन्न सार्वजनिक सेवाओं और पेशों में महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति से वो दिन दूर नहीं जब 50 प्रतिशत नेतृत्व महिलाओ के हिस्से होगा। आधी आबादी की आने वाले वर्षों में राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्रों में महिलाओं की एक नई पीढ़ी उभरकर सामने आएगी।
उन्होंने कहा कि अब ध्यान केवल सहायता तथा अवसर प्रदान करने से हटकर महिलाओं को नीतियों, कार्यक्रमों और कानूनों को सक्रिय रूप से आकार देने में सक्षम बनाने पर होना चाहिए। महिलाओं को स्वयं उन कानूनों को तय करने में भाग लेना चाहिए जो उनकी चिंताओं और आकांक्षाओं का समाधान कर सकें। उन्होंने समानता के प्रति संवैधानिक प्रतिबद्धता और महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तिकरण व आत्मनिर्भरता के लिए उठाए गए विभिन्न विधायी उपायों का जिक्र किया।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग जैसी संस्थाओं की उभरती चुनौतियों की पहचान करने और समाधान सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका है। महिला विधायक लोकसभा, राज्य विधानसभाओं, पंचायतों तथा नगर पालिकाओं के माध्यम से महिलाओं के मुद्दों को उचित मंचों तक पहुंचाने और यह सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं कि कानून जमीनी वास्तविकताओं के अनुकूल हों।
बिरला ने कहा कि जनता की चुनौतियों और आकांक्षाओं का समाधान निरंतर चर्चा और विचार-विमर्श के माध्यम से सबसे अच्छे ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने रेखांकित किया कि संवेदनशीलता महिलाओं के नेतृत्व की एक मुख्य ताकत है, जो लोगों की चिंताओं की गहरी समझ और प्रभावी समाधान खोजने की अधिक क्षमता को बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा कि एक संवेदनशील और उत्तरदायी कार्य संस्कृति सामाजिक चुनौतियों से निपटने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। महिलाओं के नेतृत्व को आगे बढ़ाना एक सामूहिक संकल्प बना रहना चाहिए और उन्होंने उम्मीद जताई कि निरंतर प्रयासों से महिलाएं राष्ट्रीय जीवन के हर क्षेत्र में तेजी से नेतृत्व के पदों पर आसीन होंगी।
उन्होंने सुझाव दिया कि इस कार्यशाला में प्रतिभागी विधायक अपने अपने क्षेत्र के अनुभवों और सफल पहलों को साझा करें, ताकि सर्वोत्तम प्रथाओं को देश भर में अपनाया जा सके। इसके अलावा, उन्होंने महिलाओं में उन कानूनों और संस्थागत तंत्रों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया जो उनकी चिंताओं के समाधान के लिए उपलब्ध हैं।
इस अवसर पर राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर, हरियाणा सरकार में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले के राज्य मंत्री राजेश नागर और 20 राज्यों तथा 2 केंद्र शासित प्रदेशों की लगभग 200 महिला विधायक उपस्थित रहे।
