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पश्चिम बर्दवान, 27 अगस्त ।

आसनसोल के बीबी कॉलेज में गुरुवार को ‘खेलो इंडिया’ कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सीधे संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कॉलेज परिसर में उपस्थित लोगों ने प्रधानमंत्री के संवाद कार्यक्रम को देखा और उनके संदेश को सुना।

सर्वभारतीय स्तर पर आयोजित ‘खेलो इंडिया संवाद’ कार्यक्रम के लिए देशभर के 1600 कॉलेजों का चयन किया गया था, जिसमें पश्चिम बंगाल से आसनसोल के बीबी कॉलेज को भी शामिल किया गया। इस अवसर पर शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल, जामुडिया के विधायक विजन मुखर्जी, आसनसोल उत्तर के विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी, भाजपा जिलाध्यक्ष देवतनु भट्टाचार्य, भाजपा नेता अभिजीत राय, बीबी कॉलेज के प्राचार्य अमिताभ बोस सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के बाद मंत्री अग्निमित्रा पाल ने विभिन्न मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

नेपाल में प्राकृतिक आपदा और लापता भारतीय पर्यटकों को लेकर अग्निमित्रा पाल ने कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया पर इस घटना से संबंधित पोस्ट और वीडियो देखे हैं। लापाता पर्यटको के लिए एक नंबर जारी किए जाने और हेल्पलाइन बनाए जाने की भी जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि नेपाल भारत का मित्र देश है और भारत हमेशा नेपाल के साथ खड़ा रहा है, आगे भी खड़ा रहेगा।

उन्होंने कहा कि फिलहाल उन्हें इस विषय में पूरी जानकारी नहीं है और मुख्यमंत्री से भी उनकी बात नहीं हुई है। आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री के साथ इस संबंध में बात की जाएगी। साथ ही दुर्गापुर से लापता पांच-छह दंपतियों के विषय में भी जानकारी ली जाएगी।

उन्होंने कहा कि सुनने में आ रहा है कि भारत के 100 से अधिक लोग अभी लापता हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि सटीक आंकड़ा बताना फिलहाल मुश्किल है। कितने भारतीय पर्यटक नेपाल गए थे, इसकी पूरी जानकारी सामने आने के बाद ही लापता लोगों की वास्तविक संख्या बताई जा सकती है। कुछ घंटों के भीतर अनुमान के आधार पर कोई निश्चित आंकड़ा देना उचित नहीं होगा।

नेपाल की घटना को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि घटना से संबंधित वीडियो देखकर वह बेहद चिंतित और भयभीत हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल से भी करीब 105-110 लोगों के लापता होने की बात सामने आ रही है और दुर्गापुर से भी कुछ लोग अब तक लापता बताए जा रहे हैं।

प्राकृतिक आपदा को लेकर उन्होंने कहा कि प्रकृति के सामने इंसान की ताकत बहुत सीमित है। उन्होंने कहा कि हम अक्सर छोटी-छोटी बातों को लेकर आपस में विवाद करते हैं, लेकिन जब प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखाती है तो इंसान उसके सामने बेहद कमजोर साबित होता है।

पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए अग्निमित्रा पाल ने कहा कि अब समय आ गया है कि अगली पीढ़ी को समझाया जाए कि हर चीज से पहले पृथ्वी को बचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जलाशयों और जलभूमि को भरकर मकान और अन्य निर्माण किए जा रहे हैं। इसी तरह पहाड़ों में भी प्रकृति के साथ छेड़छाड़ हो रही है, जिससे प्राकृतिक संतुलन लगातार बिगड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि नेपाल की इस घटना के पीछे सटीक वैज्ञानिक कारण क्या है, इसकी जानकारी उन्हें अभी नहीं है। लेकिन कई जगहों पर प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने के कारण अचानक आने वाली बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड की घटनाएं बढ़ती दिखाई दे रही हैं।

प्रकृति के साथ छेड़छाड़ पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि पेड़ काटकर निर्माण करना, जलाशयों को भरकर मॉल या इमारतें बनाना और पहाड़ों के प्राकृतिक स्वरूप के साथ छेड़छाड़ करना गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि आज मैदानी इलाकों में जलाशयों को भरने की समस्या है, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई और पहाड़ों के कमजोर होने की समस्या सामने आ रही है।

उन्होंने कहा कि पेड़ों की कटाई, बढ़ता तापमान और ग्लेशियरों का पिघलना पर्यावरणीय संतुलन के लिए गंभीर खतरा है। नदियों में अचानक बढ़ने वाला पानी बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकता है।

प्रकृति संरक्षण को लेकर उन्होंने कहा कि आज जरूरत है कि लोग अपने आने वाले बच्चों और अगली पीढ़ी के बारे में सोचें। उन्होंने कहा कि केवल सोना, संपत्ति और जमीन-जायदाद जमा करना ही पर्याप्त नहीं है। आने वाली पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य के लिए प्रकृति और पर्यावरण को बचाना भी उतना ही जरूरी है।

खेलो इंडिया कार्यक्रम को लेकर अग्निमित्रा पाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बच्चों और युवाओं के जीवन में खेल के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज बच्चों के हाथ में मोबाइल और प्लेस्टेशन हैं, जबकि उन्हें खेल के मैदान की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने भी अपने संवाद में खेल के मैदानों की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब खेल के मैदान ही खत्म कर दिए जाएंगे तो बच्चे खेलेंगे कहां। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के समय कई जगह खेल के मैदानों पर भी निर्माण को बढ़ावा दिया गया।

अपने बचपन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब वह और उनके साथ मौजूद लोग छोटे थे, तब मोबाइल फोन और आज जैसी तकनीक नहीं थी। स्कूल से लौटने के बाद खाना खाने और थोड़ी देर आराम करने के बाद बच्चे बैडमिंटन तथा दूसरे पारंपरिक खेल खेलते थे। उन्होंने कहा कि उस खेल संस्कृति को फिर से वापस लाने की जरूरत है।

युवाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर उन्होंने कहा कि खेलकूद को बढ़ावा देना केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद जरूरी है। खेल युवाओं को सकारात्मक दिशा देता है और उन्हें नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

नशे की समस्या पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि आज युवाओं के बीच ड्रग्स, चरस और गांजा जैसी नशीली चीजों का इस्तेमाल गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि कॉलेज और विश्वविद्यालयों के आसपास भी नशे की समस्या दिखाई दे रही है, जिसे रोकने के लिए समाज और सरकार को मिलकर काम करना होगा।

अंत में उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल खेल को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि युवाओं को स्वस्थ, सक्रिय और नशामुक्त बनाना भी होना चाहिए। उन्होंने ‘नशामुक्त बंगाल’ और ‘नशामुक्त भारत’ बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर जोर दिया।