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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद बने राजनीतिक हालात के बीच तृणमूल कांग्रेस अब विपक्ष की भूमिका में है, लेकिन विधानसभा में उसे अभी तक आधिकारिक रूप से विपक्षी दल का दर्जा नहीं मिला है। इस मुद्दे के साथ-साथ पार्टी के कुछ विधायकों की कथित संदिग्ध गतिविधियों को लेकर नेतृत्व सतर्क हो गया है।

इसी स्थिति को देखते हुए रविवार को तृणमूल कांग्रेस की विधानमंडलीय दल की एक अहम बैठक बुलाई गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, सभी विधायकों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। यह बैठक कोलकाता में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास के कॉन्फ्रेंस रूम में आयोजित होगी।

तृणमूल विधायक दल के नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने बताया कि बैठक में सभी विधायकों की उपस्थिति जरूरी है। उन्होंने कहा कि पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी को भी बैठक में शामिल होने का अनुरोध किया गया है, ताकि वे विधायकों को दिशा-निर्देश दे सकें।

शोभनदेव चट्टोपाध्याय, जिन्हें पार्टी ने 83 वर्ष की उम्र में विधानमंडलीय दल का नेता नियुक्त किया है, का कहना है कि संगठन को एकजुट रखना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

हाल के दिनों में पार्टी के भीतर कई घटनाओं को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हुई है। दिल्ली के पुराने बंग भवन में विधायक ऋतब्रत बनर्जी और पूर्व मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की मुलाकात को लेकर भी चर्चा रही थी। हालांकि ऋतब्रत बनर्जी ने इसे मात्र शिष्टाचार भेंट बताया था।

इसके अलावा विधानसभा में स्पीकर रथींद्र नाथ बसु के कक्ष में हुई बैठकों और कुछ विधायकों की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठे हैं। वहीं, बुधवार को स्पीकर से मुलाकात न होने पर शोभनदेव चट्टोपाध्याय और विधायक कुणाल घोष ने विधानसभा परिसर में धरना भी दिया था।

पार्टी का कहना है कि इस बैठक में संगठन को मजबूत करने, विधायकों की एकजुटता बनाए रखने और विधानसभा में विपक्षी दल का दर्जा तथा विधायकों के लिए कमरे आवंटन जैसे मुद्दों पर रणनीति तय की जा सकती है।