दो दिवसीय राष्ट्रीय नदी पर्वत सम्मेलन का समापन
जमशेदपुर, 23 मई । जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने कहा कि पहले पहाड़ और नदियों को बचाएं , फिर विकास की बात करें। । उन्होंने कहा कि आज का मॉडल थोड़ा दूसरे किस्म का है। आज वाला विकास का मॉडल विनाश का मॉडल है। उन्होंने माना कि विकास जरूरी है लेकिन विकास चरैवेति चरैवेति के सिद्धांत पर हो। पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहे और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्राकृतिक संसाधन छोड़े। इस विकास के मॉडल को उन्होंने ‘सनातन विकास’ का नाम दिया।
यहां मोतीलाल नेहरु पब्लिक स्कूल के ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय नदी पर्वत सम्मेलन के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि सरयू राय ने कहा कि विकास हो, लेकिन एकांगी न हो। इन दिनों सस्टेनेबल डेवलपमेंट की बात हो रही है। भारत सरकार ने 2030 तक सस्टेनेबल डेवलपमेंट का लक्ष्य रखा है। इतने दिनों में डेवलपमेंट को सस्टेनेबल बनाने के लिए कुछ होता दिख नहीं रहा। हमें लगता है कि सस्टेनेबल डेवलपमेंट के बदले अगर सनातन डेवलपमेंट की बात करें तो बेहतर होगा। सनातन का अर्थ क्या है-नित्य नूतन, चिर पुरातन। शुरुआती दौर से जो विकास के कार्य हो रहे हैं, हमें उन्हें आगे बढ़ाना है। उसमें कोई खामी दिखे तो उसे दूर करना है। इस तरह से विकास की धारा चलती रहती है। विकास में दिशा में कोई अचानक परिवर्तन न करे।
राय ने कहा कि हम भी विकास चाहते हैं। लेकिन हम ऐसा विकास चाहते हैं जिससे प्राकृतिक संसाधनों के अस्तचित्व पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े।
अतिथियों का सम्मान
इसके पूर्व गौतम सूत्रधार को संजीव मुखर्जी ने, अरुण शुक्ला को प्रवीण सिंह और प्रेम ने, संजय उपाध्याय को संतोष भगत तथा टुनटुन सिंह ने, प्रो. एम.के. जमुआर को नीरू सिंह और सुनीता सिंह ने, प्रो. गोपाल शर्मा को विनीत ने, मनोज सिंह को निर्मल सिंह ने शाल, पौधा और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। यूपी संघ के अध्यक्ष डीपी शर्मा का विधायक सरयू राय और राजेंद्र सिंह ने स्वागत किया।
सरयू राय की पुस्तक चेंजिंग फेस ऑफ सारंडा और स्मारिका का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान जमशेदपुर पश्चिम के विधायक और कई पुस्तकों के लेखक सरयू राय की नई पुस्तक चेंजिंग फेस ऑफ सारंडा का विमोचन हुआ। यह पुस्तक अंग्रेजी में है। इसमें सारंडा में आए परिवर्तन के बारे में जानकारी दी गई है। इस अवसर पर स्मारिका का भी विमोचन किया गया। स्मारिका के संपादक अंशुल शरण हैं। इसमें 126 पेज हैं जो पर्यावरण के विभिन्न पहलुओं पर लिखे गए लेखों से अटे पड़े हैं।
