रांची, 10 फरवरी। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य के खजाने से लगभग 10,000 करोड़ रुपये गायब होने के मामले को लेकर राज्य सरकार और वित्त मंत्री पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मरांडी ने इस मुद्दे को लेकर सरकार की कार्यशैली पर तीखा हमला बोला है।
मरांडी ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि झारखंड में आखिर चल क्या रहा है? राज्य के खजाने से लगभग 10,000 करोड़ रुपये गायब हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि वित्त मंत्री द्वारा इस राशि का हिसाब मांगे जाने के बावजूद कोई भी विभाग जवाब देने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री के निर्देश पर अधिकारियों को बैठक बुलाने के आदेश दिए जाते हैं, लेकिन न तो बैठक होती है और न ही अधिकारी मंत्री को जवाब देना जरूरी समझते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी खजाने से पैसा निकाला जा रहा है, लेकिन वह पैसा कहां और कैसे खर्च हुआ, इसका कोई लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं है। मरांडी ने कहा कि जिस तरह से वित्त मंत्री के निर्देशों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है, उससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि अधिकारियों को मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव की ओर से 10,000 करोड़ रुपये के मामले में चुप्पी साधने और जवाब न देने के निर्देश मिले हुए हैं।
मरांडी ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कांग्रेस कोटे के मंत्रियों को पूरी तरह पंगु बनाकर सत्ता का केंद्रीकरण कर लिया है। उन्होंने कहा कि यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है। मुख्य सचिव द्वारा पिछले तीन महीनों से जांच से जुड़ी फाइल को दबाकर रखना और मुख्यमंत्री की रहस्यमयी चुप्पी दोनों ही संदेह को और गहरा करती हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि एक सशक्त विपक्ष के रूप में वे इस कथित घोटाले को जनता के सामने लाएंगे और सक्षम जांच एजेंसियों से निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों को सख्त सजा दिलाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे।
