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नई दिल्ली, 20 फ़रवरी । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ज्ञान की अनंतता और उसकी अक्षुण्ण पूर्णता पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सच्चा ज्ञान बांटने से कम नहीं होता, बल्कि और अधिक विस्तृत तथा समृद्ध होता जाता है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा ज्ञान से सीखना और नए परिणाम उत्पन्न करना अनंत नई संभावनाओं और नवाचारों को जन्म देता है, जबकि मूल बुद्धिमत्ता वही रहती है।

प्रधानमंत्री ने ईशा उपनिषद के शाश्वत ज्ञान का उल्लेख करते हुए सोशल मीडिया एक्स पर संस्कृत श्लोक साझा किया,“पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥”

इसका अर्थ है कि परम सत्य या ब्रह्म अनंत और अखंड है। उससे सृष्टि की उत्पत्ति होने पर भी उसकी पूर्णता में कोई कमी नहीं आती। यह श्लोक हमें सिखाता है कि ज्ञान, ऊर्जा और सृजनशीलता जितनी अधिक बांटी जाए, उतनी ही बढ़ती है; उसकी मूल सत्ता सदैव पूर्ण और अविनाशी रहती है।