किसानों ने मांगा मुआवजा
झारखंड, 18 मार्च। राज्य में मौसम के अचानक बदले मिजाज ने एक ओर जहां लोगों को गर्मी से राहत दी है, वहीं दूसरी ओर किसानों के लिए बड़ी चिंता खड़ी कर दी है। मौसम विभाग ने 20 मार्च को तेज आंधी, वज्रपात और ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि कई जिलों में हुई ओलावृष्टि से फसलें बर्बाद हो गई हैं।
20 मार्च को तेज आंधी, वज्रपात और ओलावृष्टि की चेतावनी
रांची सहित पूरे राज्य में 20 मार्च को गर्जन के साथ वज्रपात और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार इस दौरान 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जिससे जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है।
21 मार्च तक कई जिलों में हल्की बारिश, गर्जन और वज्रपात की स्थिति बनी रह सकती है, जिसके लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और खराब मौसम में सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।
तापमान में उतार-चढ़ाव, कई जिलों में राहत
पिछले 24 घंटों में डाल्टनगंज में अधिकतम 36.8 डिग्री और कोडरमा में न्यूनतम 14.1 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। बुधवार को रांची का अधिकतम तापमान 32.2 और न्यूनतम 18.5 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं जमशेदपुर, बोकारो और चाईबासा सहित अन्य जिलों में भी तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली है।
खूंटी में ओलावृष्टि से किसानों की फसलें चौपट
खूंटी जिले में सोमवार और मंगलवार को हुई ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। आम, तरबूज और सब्जियों की खेती बुरी तरह प्रभावित हुई है। आम के पेड़ों में लगे मंजर ओलों की मार से झड़ गए, जिससे इस वर्ष उत्पादन घटने की आशंका है।
तरबूज उत्पादक किसानों का कहना है कि उनकी पूरी फसल नष्ट हो गई है। वहीं प्याज, टमाटर, बैंगन, गोभी और मिर्च जैसी सब्जियों की फसलें भी बर्बाद हो गई हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सबसे ज्यादा असर आम की खेती पर पड़ा है। इस समय आम के पेड़ों में मंजर (फूल) लगे हुए थे, जो ओलावृष्टि के कारण झड़ गए। इससे इस वर्ष आम की पैदावार पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है। किसानों का कहना है कि वे अच्छी फसल की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन अचानक आए इस मौसम ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया।
सब्जी उत्पादक किसान भी इस आपदा से अछूते नहीं रहे। टमाटर, बैंगन, गोभी, मिर्च समेत अन्य सब्जियों की फसलें ओलों की मार से नष्ट हो गईं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कर्रा प्रखंड के घुनसूली गांव के तरबूज उत्पादक किसान और ग्राम प्रधान लाल सिंह मुंडा ने बताया कि पहले ही खेती की लागत बढ़ने से मुश्किलें थीं, अब इस प्राकृतिक आपदा ने उनकी स्थिति और खराब कर दी है।
वहीं, इसी गांव के किसान रूपेश कुमार ने बताया कि उन्होंने छह एकड़ में तरबूज की खेती की थी, लेकिन ओलावृष्टि से पूरी फसल बर्बाद हो गई। उन्होंने कहा कि बारिश से ज्यादा नुकसान ओलावृष्टि ने पहुंचाया है, खासकर तरबूज और आम की फसल को।
घुनसूली के किसान सिकंदर महतो ने बताया कि उन्होंने डेढ़ एकड़ में प्याज और टमाटर की खेती की थी, जो पूरी तरह नष्ट हो गई।
किसानों ने मुआवजे की मांग उठाई
प्रभावित किसानों ने जिला प्रशासन से जल्द सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि अचानक आई इस प्राकृतिक आपदा ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है।
जिला कृषि पदाधिकारी ऋषिकेश कुमार ने बताया कि नुकसान का आकलन कराया जाएगा और आवेदन करने वाले किसानों को नियमानुसार सहायता दी जाएगी। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे अपने नुकसान की जानकारी संबंधित विभाग को दें, ताकि समय पर कार्रवाई हो सके।
