high

कोलकाता, 28 अप्रैल। पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच 350 कथित “ट्रबल मेकर्स” की सूची जारी करने को लेकर विवाद गहरा गया है। अधिवक्ता और तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने इस मुद्दे पर कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए चुनाव आयोग पर अदालत की अवमानना का आरोप लगाया है।

मंगलवार को न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की डिवीजन बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि आयोग और पुलिस पर्यवेक्षक खासतौर पर भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र को निशाना बना रहे हैं और उम्मीदवारों व मतदाताओं को डराया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कालीघाट थाने के ओसी ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया।

कल्याण बनर्जी ने अदालत से अपील की कि 29 तारीख को होने वाले मतदान तक किसी भी व्यक्ति को इस तरह के नोटिस या कार्रवाई के लिए न बुलाया जाए। साथ ही उन्होंने भविष्य में इस तरह की सूचनाएं जारी न करने की भी मांग की। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

गौरतलब है कि इससे पहले “ट्रबल मेकर” सूची को लेकर दायर एक मामले में हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि जब तक कोई व्यक्ति गैरकानूनी गतिविधि में शामिल न हो, तब तक प्रशासन को जरूरत से ज्यादा सक्रियता नहीं दिखानी चाहिए। अदालत के इस निर्देश के बाद करीब 800 लोगों की एक सूची, जिसे चुनाव आयोग ने जारी किया था, उसे वापस ले लिया गया था। हालांकि, हाल ही में आयोग ने फिर 350 लोगों की नई सूची जारी कर कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसे लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है।

सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से बताया गया कि संबंधित अधिसूचना पहले ही वापस ली जा चुकी है। इस पर कल्याण बनर्जी ने सवाल उठाया कि क्या केवल अधिसूचना वापस लेने से आयोग की कार्यशैली बदल गई है? उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग निष्पक्ष चुनाव कराने के अपने दावे पर खरा नहीं उतर रहा और भवानीपुर क्षेत्र को टारगेट किया जा रहा है।

न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन ने कल्याण बनर्जी से पूछा कि जब अधिसूचना वापस ली जा चुकी है, तो अब अदालत से उनकी क्या मांग है? इस पर उन्होंने कहा कि पुलिस के बनाए भय के माहौल में क्या लोग स्वतंत्र रूप से मतदान कर पाएंगे? उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ थाने में दुर्व्यवहार हुआ और क्षेत्र में केंद्रीय बलों की कार्रवाई से लोगों में डर का माहौल बनाया जा रहा है।

उन्होंने पुलिस पर्यवेक्षक अजय पाल शर्मा पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की भाषा और रवैया चुनावी प्रक्रिया के अनुकूल नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों से अधिकारियों को लाकर चुनाव प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग की ओर से वकील जिष्णु चौधुरी ने कहा कि अदालत ने कानून के तहत कार्रवाई करने से आयोग को नहीं रोका है। जिन लोगों के नाम सूची में हैं, उनके खिलाफ कई शिकायतें मौजूद हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें अदालत के समक्ष पेश किया जा सकता है।