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कोलकाता, 8 नवंबर । पश्चिम बंगाल में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के बीच राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया में उनकी भागीदारी के बावजूद राज्य के विकास कार्यों की प्रगति पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए।

दरअसल, जिलाधिकारियों की दोहरी भूमिका होती है। वे न केवल जिला अधिकारी हैं, बल्कि जिला निर्वाचन अधिकारी भी हैं। राज्य सरकार को आशंका है कि एसआईआर प्रक्रिया में उनकी भागीदारी के कारण विकास परियोजनाओं की नियमित निगरानी प्रभावित हो सकती है।

शनिवार को राज्य सचिवालय ‘नवान्न’ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “मुख्य सचिव मनोज पंत के कार्यालय से जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे अपने चुनावी दायित्वों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाए रखें।”

राज्य सरकार चाहती है कि चुनावी कार्यों के साथ-साथ राज्य की जनकल्याण और अवसंरचनात्मक योजनाओं की गति बनी रहे, ताकि जमीनी स्तर पर विकास कार्यों में कोई रुकावट न आए।

सूत्रों के मुताबिक, इस संबंध में सभी जिलों को लिखित रूप में निर्देश भेजे गए हैं, जिसमें कहा गया है कि एसआईआर की समयबद्धता और विकास कार्यों की निगरानी, दोनों को समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए।