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नई दिल्ली, 21 अक्टूबर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बुधवार को पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर गृहमंत्री ने ‘नशे के खिलाफ लड़ाई’ का संदेश देने वाली देशव्यापी मोटरसाइकिल रैली को झंडी दिखाकर रवाना किया।

पुलिस स्मृति दिवस कार्यक्रम में संसद सदस्य कृष्ण प्रसाद टेनेटी, राजीव कुमार, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, खुफिया ब्यूरो के निदेशक महेश दीक्षित, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर सहित अन्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के महानिदेशक और कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद करीब आठ दशकों में देश आज विश्व में एक सम्मानजनक स्थान पर खड़ा है। इसकी नींव में हमारे वीर जवानों का बलिदान है। कोई कल्पना भी नहीं कर सकता कि यदि इन जवानों ने आंतरिक सुरक्षा और देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान न दिया होता, तो आज हम कहां खड़े होते।

गृहमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 भारतीय पुलिस के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण वर्ष है। 31 मार्च 2026 को हमने दशकों से देश को पीड़ित कर रहे नक्सलवाद से मुक्ति प्राप्त की। नक्सलवाद के कारण 1981 से मार्च 2026 तक देश ने अनेक दंश झेले हैं। इस समयावधि में 3600 से अधिक जवान शहीद हुए और देश के लगभग 13,700 निर्दोष नागरिक भी अपनी जान गँवा बैठे।

गृहमंत्री ने कहा कि वे शहीद जवानों के परिजनों को बताना चाहते हैं कि पांच दशक पुरानी इस समस्या से निजात पाकर यदि देश आज विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है, तो इसकी नींव में इन 3600 जवानों का बलिदान है। गृहमंत्री ने शहीदों के परिजनों से कहा कि हम आपकी क्षति की पूर्ति नहीं कर सकते, परंतु 140 करोड़ नागरिकों वाला पूरा देश आपके परिवार के समर्पण के प्रति कृतज्ञ है।

अमित शाह ने पुलिस स्मृति दिवस के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के दुर्गम हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 10 जवानों ने चीन की सेना के हमले का डटकर मुकाबला करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। जब हम हॉट स्प्रिंग्स की उस घटना का अध्ययन करते हैं, तो यह स्पष्ट होता है कि जब संघर्ष का निर्णय ऊंची पहाड़ियों पर लिया गया होगा, तब परिणाम लगभग तय था। फिर भी उन अमर सपूतों ने देश की एक इंच भूमि भी किसी विदेशी के हाथ में न जाए, इस संकल्प को मृत्यु पर्यन्त निभाते हुए अपना अमर बलिदान दिया। तभी से 21 अक्टूबर का यह दिन प्रतिवर्ष पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है।

गृहमंत्री ने कहा कि बीते कुछ वर्षों में देश में कई समस्याएं थीं, जिनमें तीन प्रमुख समस्याओं को हम दशकों से झेल रहे थे। कश्मीर, उत्तर-पूर्व और लाल आतंक का पूरा क्षेत्र- इन तीनों हॉटस्पॉट में आज शांति है, विकास का वातावरण बना है और ये सभी क्षेत्र देश के साथ विकास की स्पर्धा में भागीदारी करने के लिए तैयार हैं।

अमित शाह ने कहा कि देश समस्याओं से पूर्णतः मुक्त नहीं हुआ है। हमारे सामने अभी भी कई समस्याएं हैं। गृह मंत्रालय ने तय किया है कि वर्ष 2026 के शेष भाग तथा 2027, 2028 एवं 2029 – इन साढ़े तीन वर्षों में हम ड्रग्स के खिलाफ एक संयुक्त लड़ाई लड़कर 31 दिसंबर 2029 तक देश को ड्रग की समस्या से मुक्ति दिलाएंगे। यह हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण लक्ष्य है।

उन्होंने कहा कि ड्रग्स की समस्या हमारी आने वाली पीढ़ियों को खोखला करती है। हमारे अर्थतंत्र पर अनावश्यक बोझ डालती है और देश विरोधी प्रवृत्तियां रखने वाले संगठनों को आर्थिक समर्थन भी प्रायः ड्रग तस्करी से ही मिलता है। गृहमंत्री ने देशभर के पुलिस बलों का आह्वान किया कि वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में तैयार किए गए ‘नशा मुक्त भारत’ के रोडमैप को जमीन पर उतारने के लिए पूरे मनोयोग से जुड़ें और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित करें।

उल्लेखनीय है कि गृहमंत्री की ओर से रवाना की गई मोटरसाइकिल रैली में राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ व दिल्ली), केंद्रीय सशस्त्र बलों (सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, बीएसएफ, एसएसबी, आईटीबीपी व एनएसजी) और कुछ केंद्रीय पुलिस संगठनों (आरपीएफ, एनडीआरएफ व एनआईए) के लगभग 90 सवार शामिल हैं।