श्रीराम लीला समिति के तत्वावधान में कल्लाजी चौराहे पर रावण दहन के साथ रामलीला के दूसरे चरण का भव्य समापन
पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के कलाकारों व स्कूली बच्चों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां, उमड़ा जनसैलाब
उदयपुर, 20 अक्टूबर। ‘खल मनुजदह करि बिमल कीरति जग सुजस बिस्तारिया। रावनहि मारि अनन्त प्रभु जय सुरन्ह के संताप हरिया॥’
गोस्वामी तुलसीदास जी की इन्हीं पावन चौपाइयों और प्रभु श्रीराम के गगनभेदी जयकारों के बीच मंगलवार को हिरणमगरी सेक्टर-14 नेला स्थित कल्लाजी चौराहे पर असत्य—अधर्म—दंभ के प्रतीक दशानन का घमंड जलकर खाक हो गया।
श्रीराम लीला समिति के तत्वावधान में आयोजित 10 दिवसीय मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम लीला महोत्सव के दूसरे चरण का समापन पारंपरिक वैभव, लोक संस्कृति और अध्यात्म के अनूठे संगम के साथ हुआ। जैसे ही प्रभु श्रीराम के स्वरूप ने अग्निबाण संधान किया, गगनचुंबी आतिशबाजी के धमाकों के साथ रावण का पुतला धूं-धूं कर जल उठा और उपस्थित अपार जनसमूह ‘जय श्री राम’ के उद्घोष से झूम उठा।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां, जीवंत हुई लोक परंपरा

आयोजन संयोजक डॉ. विजय प्रकाश विप्लवी ने बताया कि इस वर्ष 9 से 18 अक्टूबर तक पहले चरण में निम्बार्क महाविद्यालय रामलीला प्रांगण में भव्य रामलीला का मंचन हुआ। दूसरे चरण में दशहरे पर मंगलवार को रावण दहन का आयोजन किया गया। महोत्सव का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। इसके बाद नन्हे-मुन्ने बच्चों ने विघ्नहर्ता की आराधना में भावपूर्ण गणेश वंदना प्रस्तुत की। राष्ट्रभारती एकेडमी के विद्यार्थियों ने राजस्थानी लोक नृत्य, शास्त्रीय भरतनाट्यम और भावप्रवण रामलीला प्रसंगों के सजीव मंचन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं नवजीवन स्कूल की छात्रा उन्नति एवं समूह की मोहक प्रस्तुति ने खूब तालियां बटोरीं।
कार्यक्रम में पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के ख्यातनाम कलाकारों ने राजस्थान की समृद्ध संस्कृति को मंच पर साकार कर दिया। लंगा, मांगणियार गायकी की सुरमई तानों, चकरी, गोंडल व कालबेलिया नृत्य के तेज घुमावों और सिर पर कई मटके रखकर किए गए हैरतअंगेज भवई नृत्य ने प्रांगण को तालियों से गुंजायमान कर दिया।
‘अपने भीतर के विकारों का करें दहन’

समिति अध्यक्ष धर्मनारायण जोशी ने बताया कि विजयदशमी महोत्सव में मुख्य अतिथि उपमहापौर दिनेश भट्ट थे, जबकि अध्यक्षता पूर्व आईपीएस डॉ. टी. सी. डामोर ने की। अतिथियों ने समाज को भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश देते हुए कहा कि रावण दहन केवल एक पुतले का दहन नहीं, बल्कि अपने भीतर के विकारों और बुराइयों को तिलांजलि देने का पावन संकल्प है।
महासचिव भंवर लाल शर्मा ने बताया कि इस अवसर पर समिति के समन्वयक अशोक बाबेल, हरीश मारवाड़ा, प्रवक्ता कौशल मूंदड़ा, कमल कुमावत, हृषिकेश शर्मा, गौरांग शर्मा, राजकमल लौहार, हरिशंकर तिवारी सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी, मातृशक्ति और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। संयोजन रीना परसाई ने व धन्यवाद ज्ञापन अशोक बाबेल ने किया।
