सिल्ली पॉलिटेक्निक में राष्ट्रीय कार्यशाला ‘आईएओटी–26’ का उद्घाटन
रांची, 20 मई। झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने मंगलवार को सिल्ली पॉलिटेक्निक में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला “नेशनल हैंड्स ऑन वर्कशॉप ऑन इंडस्ट्री ओरिएंटेड ऑटोमेशन एंड आईओटी सिस्टम (IAOT–26)” का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं से आधुनिक तकनीकों को अपनाने और नवाचार आधारित कौशल विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा कि आने वाला समय विज्ञान, तकनीक और नवाचार का है।
राज्यपाल ने कहा कि ऑटोमेशन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) जैसी आधुनिक तकनीकें आज उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और दैनिक जीवन के लगभग हर क्षेत्र में व्यापक बदलाव ला रही हैं। ऐसे समय में युवाओं को उद्योगोन्मुख तकनीकी कौशल से जोड़ना अत्यंत आवश्यक हो गया है।
उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा तभी सार्थक मानी जाएगी, जब विद्यार्थियों को प्रयोग, अनुसंधान, नवाचार और व्यवहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से सीखने का अवसर मिले। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, स्मार्ट सिस्टम और डिजिटल टेक्नोलॉजी का तेजी से विस्तार हो रहा है तथा भविष्य उन्हीं युवाओं का होगा, जो नई तकनीकों को सीखने, अपनाने और उनमें नवाचार करने की क्षमता रखते हैं।
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने हाल ही में आयोजित एआई समिट का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के पास कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने की पूरी क्षमता है। उन्होंने कहा कि झारखंड युवा प्रतिभाओं से समृद्ध राज्य है और यहां युवाओं में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। जरूरत केवल उन्हें सही मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीकी शिक्षा और उपयुक्त अवसर उपलब्ध कराने की है।
उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी तकनीक आधारित कौशल में दक्ष बनते हैं तो वे केवल रोजगार प्राप्त करने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले भी बन सकते हैं। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश “आत्मनिर्भर भारत”, “डिजिटल इंडिया”, “स्टार्टअप इंडिया” और “स्किल इंडिया” जैसे अभियानों के माध्यम से तकनीक और नवाचार आधारित विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी कौशल आधारित और व्यवहारिक शिक्षा पर विशेष बल दिया गया है तथा यह कार्यशाला उसी सोच को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने ज्ञान और तकनीकी कौशल को निरंतर विकसित करें। साथ ही उन्होंने शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों से अपेक्षा की कि वे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मकता और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आईएओटी–26 कार्यशाला विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी सिद्ध होगी तथा इससे तकनीकी शिक्षा को नई दिशा मिलने के साथ उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा।
