चुनाव ड्यूटी में लगे अन्य जिलों के कर्मचारियों को नहीं मिला मताधिकार
कौशल मूंदड़ा
उदयपुर, 11 सितम्बर। नगर निकाय चुनाव की मतदान प्रक्रिया में पोस्टल बैलेट को लेकर बड़ी खामी सामने आई है। चुनाव ड्यूटी में तैनात ऐसे कर्मचारी, जो अपने गृह जिले से बाहर अन्य जिलों के निकाय क्षेत्रों में ड्यूटी पर थे, उन्हें अपने होम टाउन की नगरपालिका या नगर निगम का पोस्टल बैलेट उपलब्ध नहीं हो सका। इसके चलते कई कर्मचारी अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने से वंचित रह गए।
विडंबना यह रही कि चुनाव आयोग की ओर से मतदान में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी और प्रत्येक मतदाता को अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए लगातार जागरूक किया जाता रहा, लेकिन चुनाव ड्यूटी में लगाए गए कर्मचारियों के लिए ही पोस्टल बैलेट की समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी। इस स्थिति को लेकर प्रभावित कर्मचारियों में रोष नजर आया।
बताया गया कि जिन कर्मचारियों की ड्यूटी उनके ही गृह नगर अथवा संबंधित नगरपालिका क्षेत्र में थी, वे ही पोस्टल बैलेट के माध्यम से मतदान कर सके। लेकिन अन्य जिलों के ऐसे कर्मचारी, जिन्हें किसी दूसरे जिले के निकाय क्षेत्र में चुनाव ड्यूटी पर लगाया गया था, उनके लिए उनके होम टाउन का बैलेट पेपर उपलब्ध कराने की प्रभावी व्यवस्था नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप वे मतदान करने की इच्छा और पात्रता होने के बावजूद अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर पाए।
मामले में संबंधित अधिकारियों ने भी व्यवस्था की इस कमी को स्वीकार किया। अधिकारियों के अनुसार लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान जयपुर में केंद्रीयकृत बैठकें आयोजित होती है, उन्हीं बैठकों के दौरान अलग-अलग जिलों के पोस्टल बैलेट पेपर के आदान-प्रदान की व्यवस्था हो जाती है। इसके चलते चुनाव ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को उनके संबंधित निर्वाचन क्षेत्र का पोस्टल बैलेट उपलब्ध कराया जा सकता है। लेकिन स्थानीय निकाय चुनाव में ऐसी केंद्रीयकृत व्यवस्था नहीं होने के कारण यह समस्या सामने आई।
कर्मचारियों का कहना है कि चुनाव ड्यूटी में लगना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन इसके चलते उन्हें अपने ही मताधिकार से वंचित होना उचित नहीं है। जब चुनाव आयोग स्वयं मतदान के अधिकार को लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल करता है, तो चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने में जुटे कर्मचारियों के लिए मतदान सुनिश्चित करने की व्यवस्था भी उतनी ही मजबूत होनी चाहिए थी।
स्थानीय निकाय चुनाव में सामने आई यह खामी अब व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है कि जब चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों को ही अपने मताधिकार के प्रयोग का अवसर नहीं मिल पाए, तो मतदान प्रतिशत बढ़ाने और शत-प्रतिशत मतदान के संदेश की वास्तविकता कितनी प्रभावी है।
