कोलकाता, 07 अक्टूबर । तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल के दौरान उत्तर 24 परगना जिलान्तर्गत टाकी नगर पालिका में करोड़ों रुपये के वित्तीय भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस पूरे प्रकरण की जांच राज्य अपराध जांच विभाग (सीआईडी) को सौंपने का निर्देश दिया है। यह जांच हाईकोर्ट की प्रत्यक्ष निगरानी में संचालित होगी। इसके साथ ही अदालत ने इस मामले में सहयोग के लिए अधिवक्ता तिलक मित्रा को ‘अदालत मित्र’ (एमिकस क्यूरी) नियुक्त किया है।
बुधवार को मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति ओम नारायण राय की खंडपीठ में इस मामले पर लंबी सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जनता के टैक्स की गाढ़ी कमाई का इस तरह दुरुपयोग किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
यह मामला वर्ष 2023 का है, जब टाकी नगर पालिका के तत्कालीन अध्यक्ष सोमनाथ मुखर्जी और बोर्ड के कामकाज पर गंभीर सवाल उठे थे। नगर पालिका बोर्ड के खिलाफ किसी विपक्षी दल ने नहीं, बल्कि खुद तृणमूल कांग्रेस के तत्कालीन पार्षद प्रद्युत दास ने मोर्चा खोला था। उन्होंने आरोप लगाया था कि नगर पालिका में भारी पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियां हुई हैं और सरकारी फंड की हेराफेरी की गई है।
पार्षद प्रद्युत दास ने इस संबंध में तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी लिखित शिकायत की थी, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। दास का आरोप है कि इसके विपरीत उन्हें लगातार धमकियां दी जाने लगीं। इसके बाद उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और पिछले आठ वर्षों में हुए वित्तीय गबन, भाई-भतीजावाद और अनियमितताओं को लेकर एक जनहित याचिका दायर की।
बुधवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता प्रद्युत दास की ओर से अधिवक्ता सौम्य मजूमदार और उमर फारुक गाजी ने अदालत में पक्ष रखा। वकीलों ने दलील दी कि उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, टाकी में इच्छामती नदी पर फ्लोटिंग (तैरता हुआ) रेस्तरां बनाने के नाम पर करीब 80 लाख रुपये का गबन किया गया। आरोप है कि इस पूरे घोटाले में तत्कालीन पालिका अध्यक्ष और बोर्ड की सीधी संलिप्तता थी।
इसके अलावा, सरकारी जमीनों को नियमों को ताक पर रखकर लीज पर देने में भी भारी वित्तीय भ्रष्टाचार किया गया। वकीलों ने यह भी अदालत के सामने रखा कि पालिका बोर्ड में बिना कोई औपचारिक प्रस्ताव पारित किए, तत्कालीन अध्यक्ष ने अपनी मनमर्जी से ये सारे फैसले लिए थे।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरी जांच सीआईडी को सौंप दी और निर्देश दिया कि जांच प्रक्रिया अदालत की निरंतर निगरानी में चलेगी। हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 10 दिसंबर तय की है।
