कोलकाता, 29 अप्रैल। “भक्त के वश में हैं भगवान” के संदेश को साकार करने वाला पावन पर्व नृसिंह जयंती इस वर्ष भी महानगर कोलकाता और उपनगरीय क्षेत्र लिलुआ में पूरे उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। 30 अप्रैल (बृहस्पतिवार) को आयोजित होने वाले इस महोत्सव को लेकर शहरभर में धार्मिक उत्साह चरम पर है।
विशेष रूप से बड़ाबाजार क्षेत्र में सौ वर्षों से अधिक पुरानी परंपरा के तहत इस पर्व को भव्य रूप में मनाने की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। विभिन्न मंदिरों और अखाड़ों में कलाकारों द्वारा रिहर्सल का दौर जारी है, जिससे आयोजन को और भी जीवंत एवं प्रभावशाली बनाया जा सके।
नाट्य शैली में जीवंत होगा नृसिंह अवतार
बड़ाबाजार के विभिन्न हिस्सों में भगवान नृसिंह के अवतार की कथा का नाट्य रूपांतरण किया जाएगा। इस प्रस्तुति में भक्त प्रह्लाद की अटूट आस्था और हिरण्यकश्यप के अहंकार का चित्रण किया जाएगा। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार संध्या बेला में खंभ से प्रकट होकर भगवान नृसिंह द्वारा अधर्म का अंत करने की लीला का मंचन होगा, जिसके उपरांत महाआरती के साथ कार्यक्रम का समापन किया जाएगा।
इन क्षेत्रों में रहेगी विशेष रौनक
बड़ाबाजार के राजाकाटला स्थित नृसिंह देव मंदिर, बांसतल्ला का भैरव मंदिर, ढाकापट्टी स्थित शिव मंदिर एवं अखाड़ा, नीमूतल्ला का कोठारी पार्क और नीमूतल्ला मोड़, आनंद भैरव, सिंहगढ़ मोड़, शिव ठाकुर गली स्थित रामदेव जी मंदिर, गणेश टॉकीज तथा पोस्ता मोड़ सहित कई स्थानों पर भव्य आयोजन होंगे।
इन आयोजनों को सफल बनाने में दीपक हर्ष, जगदीश हर्ष, राजकुमार व्यास, वरदमूर्ति व्यास, आशु पुरोहित, महेंद्र पुरोहित, विश्वनाथ व्यास, किशन छंगाणी, डॉ. कालवाणी, भंवर महाराज, राजा रंगा, सूरज व्यास एवं उनके सहयोगी सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।
लिलुआ में पुष्करणा समाज का 16वां महोत्सव
वहीं, लिलुआ के पुष्करणा ब्रह्म बगीचा में भी पिछले 16 वर्षों से लगातार नृसिंह जयंती महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। स्थानीय पुष्करणा समाज के सामूहिक सहयोग से होने वाले इस आयोजन की तैयारियाँ भी जोरों पर हैं।
कार्यक्रम के संयोजक पी. शीतल हर्ष ने बताया कि इस आयोजन के प्रति स्थानीय श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और आस्था है। यहां भी पारंपरिक विधि-विधान के साथ भगवान नृसिंह के प्राकट्य उत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा।
इस प्रकार, कोलकाता महानगर में नृसिंह जयंती न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनेगी, बल्कि सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक एकता का भी सजीव उदाहरण प्रस्तुत करेगी।
