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पूर्व मेदिनीपुर, 07 मार्च । इलीश (हिलसा) के लिए प्रसिद्ध रूपनारायण नदी में शोधकर्ताओं ने मछली की एक नई प्रजाति खोज निकाली है। यह खोज तमलुक के ताम्रलिप्त महाविद्यालय (तमरालिप्त कॉलेज) के प्राणिविद्या (जूलॉजी) विभाग के वैज्ञानिकों द्वारा की गई। अंतरराष्ट्रीय साइंस जर्नल ‘जूटाक्सा’ में इस नई मछली का शोधपत्र प्रकाशित हुआ है।

शोध के अनुसार इस मछली का नामकरण ‘बुटिस बर्गभीमी’ रखा गया है, जो तमलुक के इतिहासप्रसिद्ध देवी बर्गभीमा के नाम पर आधारित है।

विद्यासागर विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर और प्राणिविद्या विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. तन्मय भट्टाचार्य के मार्गदर्शन में यह खोज हुई। इसमें ताम्रलिप्त महाविद्यालय के सहयोगी प्रोफेसर और पीजी को-ऑर्डिनेटर डॉ. प्रीतिरंजन पहाड़ी, तथा शोधकर्ता शुभदीप मायती, सुदीप्ता मंडल और मिताली दास शामिल थे।

शोध के अनुसार, जून 2022 से अगस्त 2024 तक रूपनारायण नदी में लगातार सर्वेक्षण किया गया और स्थानीय मछुआरों की मदद से कई मछली के नमूने संग्रहित किए गए। प्रारंभ में ये मछलियां परिचित प्रजाति की लग रही थीं, लेकिन विस्तृत परीक्षण में उनके संरचनात्मक गुण किसी ज्ञात प्रजाति से मेल नहीं खाते थे।

लैब और डीएनए परीक्षण के बाद शोधकर्ताओं ने पुष्टि की कि यह मछली पूरी तरह से नई प्रजाति की है। इसे ‘बुटिस’ गण में वर्गीकृत किया गया है। अन्य प्रजातियों के साथ कुछ समानताऐं होने के बावजूद इसकी पंखों पर विशेष डोरा धब्बे, शरीर की स्केल व्यवस्था और सिर की संरचना इसे अलग प्रजाति बनाती हैं। संग्रहित नमूनों में से एक होलोटाइप और अन्य नमूने कोलकाता के जूलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया की संग्रहशाला में सुरक्षित किए गए हैं।

डॉ. प्रीतिरंजन पहाड़ी ने कहा, “हमने मछली को रूपनारायण नदी से एकत्र किया और अन्य प्रजातियों के साथ सभी भेदों की जांच की। डीएनए परीक्षण से यह स्पष्ट हुआ कि यह अलग प्रजाति है।”

पांच मार्च को न्यूजीलैंड के अंतरराष्ट्रीय जर्नल ‘जूटाक्सा’ में इस नई मछली की खोज प्रकाशित हुई। शुक्रवार शाम कॉलेज की कार्यवाहक प्राचार्या संचिता मुखर्जी चक्रवर्ती ने कहा, “यह हमारे कॉलेज के लिए गर्व की बात है। देवी बर्गभीमा के नाम से जुड़ने से खुशी और बढ़ जाती है।”