कोलकाता, 19 अगस्त। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा और कार्य शिक्षा विषयों में प्रतीक्षा सूची से नियुक्ति के लिए पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार द्वारा बनाए गए एक हजार 600 अतिरिक्त पदों को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। बुधवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि वह इन अतिरिक्त पदों से संबंधित पिछली सरकार की नियुक्ति अधिसूचनाओं के आधार पर आगे नहीं बढ़ेगी। सरकार ने दोनों अधिसूचनाओं को वापस लेने की जानकारी अदालत को दी।
ममता बनर्जी सरकार ने उच्च प्राथमिक में शारीरिक शिक्षा और कार्य शिक्षा विषयों में प्रतीक्षा सूची से अभ्यर्थियों की नियुक्ति के लिए एक हजार 600 अतिरिक्त पद बनाए थे। नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ी जटिलताओं को दूर करने के लिए तत्कालीन मंत्रिमंडल ने यह निर्णय लिया था। इस संबंध में 19 मई और 14 अक्टूबर 2022 को अधिसूचनाएं जारी की गई थीं।
हालांकि, कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विश्वजीत बसु की एकल पीठ ने राज्य सरकार के इस फैसले को खारिज कर दिया था। अदालत ने कहा था कि नियमित नियुक्ति के लिए सामान्य तौर पर अतिरिक्त पद नहीं बनाए जा सकते। ऐसे पद केवल विशेष परिस्थितियों में ही बनाए जा सकते हैं।
एकल पीठ के फैसले को चुनौती देते हुए तत्कालीन राज्य सरकार ने हाई कोर्ट की खंडपीठ में अपील दायर की थी। बुधवार को न्यायमूर्ति राजाशेखर मंथा की खंडपीठ में मामले की सुनवाई थी। इसी दौरान नई राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि वह पिछली सरकार की दोनों अधिसूचनाओं के आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाएगी और उन्हें वापस ले रही है। मामले में नौकरी से वंचित अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता फिरदौस शमीम ने पक्ष रखा।
गौरतलब है कि नियुक्ति में कथित भ्रष्टाचार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 2016 की स्कूल सेवा आयोग की पूरी भर्ती सूची रद्द कर दी थी। इसके चलते करीब 26 हजार शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों की नौकरी चली गई थी। हालांकि, इसी मामले से जुड़े एक चरण में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा बनाए गए अतिरिक्त पदों के फैसले में हस्तक्षेप नहीं किया था। इसी आदेश का हवाला देते हुए तत्कालीन ममता सरकार ने हाई कोर्ट में राहत की मांग की थी, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया था।
दूसरी ओर, भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद हाई कोर्ट ने मानवीय आधार पर करीब 32 हजार प्राथमिक शिक्षकों की नौकरी बरकरार रखी थी।
