रांची, 03 अगस्त । झारखंड के कथित शराब घोटाला मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से जांच कराने की मांग को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की ओर से दायर जनहित याचिका पर सोमवार को झारखंड उच्च न्यायालय में आंशिक सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि याचिका में कुछ तकनीकी त्रुटियां थीं, जिन्हें अब सुधार लिया गया है। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी।
जनहित याचिका में बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया है कि झारखंड के कथित शराब घोटाले में एक आईएएस अधिकारी सहित कई प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता की आशंका है। ऐसे में मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए इसकी जांच सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए। उनका कहना है कि वर्तमान जांच की गति और दिशा को देखते हुए पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए केंद्रीय एजेंसी की जांच आवश्यक है।
याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2025 में इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच के दौरान कुछ आरोपितों को गिरफ्तार भी किया गया, लेकिन निर्धारित समय सीमा के भीतर आरोप पत्र दाखिल नहीं किए जाने के कारण सभी आरोपितों को डिफॉल्ट बेल मिल गई।
मरांडी ने अपनी याचिका में यह भी उल्लेख किया है कि प्राथमिकी दर्ज होने के करीब 14 महीने बीत जाने के बावजूद अब तक आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया है। उनका आरोप है कि जांच बेहद धीमी गति से आगे बढ़ रही है, जिससे पूरे मामले की निष्पक्षता और प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने अदालत से आग्रह किया है कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपकर दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से याचिका में मौजूद तकनीकी त्रुटियों के सुधार की जानकारी दिए जाने के बाद अदालत ने मामले की सुनवाई फिलहाल स्थगित कर दी। अब संशोधित याचिका पर अगली तिथि में विस्तृत सुनवाई होने की संभावना है।
