रांची, 6 अगस्त। झारखंड में 14वीं जेपीएससी, जेएसएससी-सीजीएल समेत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और धांधली के विरोध में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जारी सत्याग्रह और आमरण अनशन के बीच छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अभ्यर्थियों की मांगें नहीं मानी गईं तो देशभर के युवा इस आंदोलन का हिस्सा बनेंगे।
बरकट्ठा (हजारीबाग) निवासी महेंद्र मंडल ने हिंदुस्थान समाचार से विशेष बातचीत में कहा कि उन्होंने अनशन शुरू होने के बाद से पानी की एक बूंद तक ग्रहण नहीं की है। उन्होंने कहा कि यदि उनके या किसी अन्य आंदोलनकारी छात्र के साथ कोई अनहोनी होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
महेंद्र मंडल ने कहा कि छात्र अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें हैं कि 14वीं जेपीएससी, जेएसएससी-सीजीएल समेत विवादित भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर पूरी पारदर्शिता के साथ दोबारा आयोजित किया जाए तथा अनियमितताओं में संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए।
उन्होंने दावा किया कि झारखंड के युवाओं की आवाज अब राज्य तक सीमित नहीं रहेगी। यदि सरकार ने समय रहते सकारात्मक पहल नहीं की, तो ऑल इंडिया के ‘जेन जी ग्रुप’ सहित देश के विभिन्न राज्यों के युवा भी झारखंड पहुंचकर आंदोलन को समर्थन देंगे।
महेंद्र मंडल ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि लाखों प्रतियोगी छात्रों के भविष्य और न्याय की लड़ाई है। उन्होंने सरकार से अभ्यर्थियों की मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील करते हुए कहा कि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग कर रहे हैं और उन्हें न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश..
सवाल (1) : अगर सरकार आपकी मुख्य मांगें नहीं मानती है, तो आपकी अगली रणनीति क्या होगी? क्या यह आंदोलन पूरे झारखंड में और व्यापक रूप लेगा?
जबाव : देखिए, हम घर से यही सोचकर निकले थे कि या तो हम मर जाएंगे या इसबार छात्रों को उनका हक और अधिकार दिलाकर रहेंगे। वर्ष 2014 से तैयारी कर रहे हैं। जेएसएससी-सीजीएल जैसी परीक्षाएं नौ बार दे चुके हैं। वर्ष 2025-26 की भर्ती प्रक्रिया में बड़े स्तर पर धांधली हुई। इसी के विरोध में आमरण अनशन पर बैठे हैं। अभी तक पानी भी नहीं पिया है। सरकार मांगें नहीं मानती है तो हम यहां से नहीं उठेंगे। चाहे तबीयत खराब हो जाए, इलाज आंदोलन स्थल पर होगा, अस्पताल भी नहीं जाएंगे। अनशन आंदोलन के दौरान मांगे नहीं मानी जाती है या किसी के साथ कोई अनहोनी होती है। तो जेन-जी ग्रुप ऑल इंडिया से झारखंड आएंगे। फिर उसकी जवाबदेही सरकार की होगी।
सवाल (2) : सरकार और जांच एजेंसियां कार्रवाई तो कर रही हैं। फिर भी आप सिर्फ उच्चस्तरीय जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग पर क्यों अड़े हैं?
जबाव : सीआईडी जांच में 14 पदाधिकारियों की गिरफ्तारी हुई है। अब सरकार को जेपीएससी और जेएसएससी को रिफॉर्म करना चाहिए। जो कर्मचारी धांधली में शामिल नहीं हैं, उन्हें रखते हुए दोषियों को जेल भेजा जाए। सरकार दो माह में रिफॉर्म की घोषणा करे और स्पष्ट करे कि पुराने विवादित कर्मचारी जेपीएससी कार्यालय नहीं रहेंगे। 14वीं जेपीएससी परीक्षा पर तत्काल नोटिस जारी हो। अभय तिवारी जैसे आरोपी जितनी भी परीक्षाओं में संलिप्त रहे हैं, उनकी सीबीआई या अन्य उच्चस्तरीय जांच हो। सरकार की ओर से हमें सिर्फ आश्वासन देकर हमारा आंदोलन खत्म नहीं कराया जा सकता।
सवाल (3) : यदि आपकी तबीयत और बिगड़ती है, तो क्या चिकित्सकीय सलाह मानेंगे?
जबाव : डॉक्टर हम पर दबाव बनाने के बजाय सरकार को हमारी वर्तमान स्थिति को बताएं। सरकार जल्द संज्ञान ले, नहीं तो कोई भी अनहोनी हो सकती है। लेकिन हम मांगें पूरी होने तक अनशन से नहीं हटेंगे।
सवाल (4) : क्या आपके पास कथित अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज या सबूत हैं?
जवाब : आंदोलन की कोर कमेटी के पास कई दस्तावेज हैं। मुझे फिलहाल सभी कागजात की जानकारी नहीं है, लेकिन वर्षों से परीक्षाएं देते-देते हम समझ चुके हैं कि जेपीएससी सीजीएल जैसी बड़ी परीक्षाओं में धांधली कैसे होती है। सरकार यदि हमारे तथ्यों के आधार पर लोगों को गिरफ्तार कर रही है तो निष्पक्ष जांच कर पूरी सच्चाई सामने लाए। नहीं तो बोल दे अभ्यर्थियों के सबूत के बूते ही जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे। सबूत देने को तैयार हैं।
सवाल (5) : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष के लिए आपका पहला और अंतिम संदेश क्या होगा?
जबाव : मुख्यमंत्री स्वयं या प्रतिनिधिमंडल भेजकर अनशन स्थल पर आकर आंदोलनकारियों से बातचीत करें। सबसे पहले भूख हड़ताल खत्म कराने का प्रयास करें। हमारी पहली और अंतिम शर्त है कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा रद्द हो, रिफॉर्म की मांग स्वीकार हो, पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच हो, अभय तिवारी जैसे आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई हो तथा लंबित परीक्षाओं के लिए फ्रेश कैलेंडर या पारदर्शी तरीके से पुराने कैलेंडर के अनुसार परीक्षा कराने की घोषणा की जाए।
सवाल (6) : अगर अनशन के दौरान आपकी या किसी अन्य की मौत ही हो जाती है और फिर भी सरकार आपकी मांगें नहीं मानती है तो?
जवाब : मेरा मानना है कि इससे झारखंड के युवाओं का आंदोलन और मजबूत होगा। हर तरफ आग लग जाएगा। यदि किसी भी छात्र-अभ्यर्थी के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो ऑल इंडिया के जेन जी ग्रुप के युवा झारखंड आएंगे और आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे। हमारा साथ देंगे। इसके बाद झारखंड की जो स्थिति बनेगी, वह देखने लायक होगी। सरकार को समय रहते गंभीरता से इस आंदोलन की गहराई में जाकर गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए।
