रांची, 09 फरवरी । जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) में अवैध निर्माण और नक्शा विचलन से जुड़े मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने एक प्रतिवादी को आंशिक राहत प्रदान की है।
उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने राकेश कुमार झा की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रतिवादी संख्या 13 (कहकश नाहिद ) के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश पारित किया।
इससे पहले सुनवाई के दौरान प्रतिवादी संख्या 13 की ओर से अदालत को बताया गया कि अब तक इस मामले में उनका पक्ष नहीं सुना गया है। उनके अधिवक्ता ने उच्चतम न्यायालय के पूर्व आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि अवैध निर्माण से जुड़े कुछ मामलों में शीर्ष अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने प्रतिवादी संख्या 13 के कथित अवैध निर्माण के मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। साथ ही मामले की अगली सुनवाई के लिए 9 मार्च की तिथि निर्धारित की गई है।
प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता निरंजन कुमार ने अदालत के समक्ष झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा 14 जनवरी और 28 जनवरी 2026 को पारित आदेशों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 14 जनवरी 2026 को तीन अधिवक्ताओं की समिति की रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने जेएनएसी क्षेत्र में अवैध भवनों को ध्वस्त करने का निर्देश दिया था।
इसके बाद प्रतिवादियों की ओर से दायर आवेदनों को उच्च न्यायालय ने 28 जनवरी 2026 को खारिज कर दिया था। इन दोनों आदेशों को चुनौती देते हुए राकेश कुमार झा ने उच्चतम न्यायालय में भी जनहित याचिका दायर की थी।
उल्लेखनीय है कि राकेश कुमार झा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड उच्च न्यायालय ने जेएनएसी क्षेत्र में कुल 24 प्रतिवादियों के अवैध निर्माण को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। प्रतिवादियों ने 14 जनवरी 2026 के आदेश में संशोधन और ध्वस्तीकरण पर रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने यह कहते हुए मांग खारिज कर दी थी कि अवैध निर्माण किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
हालिया आदेश में हालांकि अदालत ने प्रतिवादी संख्या 13 के मामले में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश देकर उन्हें अस्थायी राहत दी है, जबकि अन्य प्रतिवादियों के संबंध में पूर्व आदेश यथावत प्रभावी रहेंगे।
