2

रांची, 28 सितंबर। झारखंड उच्च न्यायालय ने चतरा में पखा से लेरहो स्कूल तक 10.3 किलोमीटर सड़क की मरम्मत और रखरखाव के बकाये 52.12 लाख रुपये के भुगतान की मांग से संबंधित याचिका खारिज कर दी है। न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार ने ठेकेदार के बकाये की राशि स्वीकार नहीं की है। काम पूरा हुआ था या नहीं और सड़क निर्माण में कमियां थीं या नहीं, यह तय करने के लिए साक्ष्यों की जरूरत होगी। ऐसे जटिल विवाद का निपटारा संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर रिट याचिका में नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति आनंदा सेन की अदालत ने ठेकेदार बलेश्वर यादव की ओर से दायर याचिका पर सोमवार को यह आदेश दिया। हालांकि, न्यायालय ने याचिकाकर्ता को अपने बकाये की राशि की वसूली के लिए सक्षम सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता दी है।

याचिकाकर्ता पंजीकृत ठेकेदार है और उसे पखा से लेरहो स्कूल तक 10.3 किलोमीटर सड़क के मरम्मत कार्य का ठेका मिला था। ठेकेदार का दावा था कि उसने काम पूरा कर दिया था, लेकिन 52.12 लाख रुपये का भुगतान लंबित है। इसके अलावा उसने 8.80 लाख रुपये की सिक्योरिटी राशि, भुगतान से काटी गई पांच प्रतिशत राशि और ब्याज जारी करने की मांग की थी।

ठेकेदार ने अदालत को बताया कि संबंधित क्षेत्र उग्रवाद प्रभावित था। काम के दौरान सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग के बावजूद प्रशासन की ओर से पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी गई। उसके अनुसार, उसने 29 जून 2017 तक सड़क मरम्मत का काम पूरा कर दिया था। बाद में सड़क क्षतिग्रस्त होने की जानकारी भी उसने विभाग को दी थी।

राज्य सरकार ने ठेकेदार के दावों का विरोध करते हुए कहा कि करीब 1.75 करोड़ रुपये के समझौता कार्य में निर्धारित समय सीमा के भीतर काम पूरा नहीं किया गया। बाद में समय सीमा बढ़ाई गई, लेकिन इसके बावजूद काम पूरा नहीं हुआ। सरकार के अनुसार, अधिकारियों ने 20 जून 2019 को निरीक्षण किया था, जिसमें ह्यूम पाइप की पैरापेट अधूरी, प्रीमिक्स उखड़ा हुआ और ह्यूम पाइप टूटा हुआ पाया गया था। विभाग का कहना था कि कमियां दूर होने और अंतिम माप लिए जाने के बाद ही भुगतान पर विचार किया जा सकता है।

राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि ठेकेदार को अब तक 1,23,80,413 रुपये का भुगतान किया जा चुका है और विभाग के अनुसार इसके अलावा कोई राशि देय नहीं है। काम अधूरा होने के कारण माप पुस्तिका में अंतिम माप भी दर्ज नहीं किया गया है।

अदालत ने कहा कि सरकार ने याचिकाकर्ता द्वारा दावा की गई राशि को स्वीकार नहीं किया है। इसके विपरीत, राज्य ने काम अधूरा रहने और निर्माण में कमियां होने का आधार बताया है। इन विवादित तथ्यों को साबित करने के लिए साक्ष्य की आवश्यकता होगी। इसलिए इस मामले का फैसला रिट क्षेत्राधिकार में करना उचित नहीं है। न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए ठेकेदार को सक्षम सिविल कोर्ट में जाने की स्वतंत्रता दी।