खूंटी, 28 सितंबर। पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने एमएमडीआर एक्ट में हुए संशोधन को लेकर राज्य सरकार पर जनता के बीच भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है। सोमवार को खूंटी परिसदन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि संशोधन पूरे देश में खनिज संसाधनों के समान और वैज्ञानिक उपयोग और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर किया गया है। उन्होंने कहा कि संशोधन से राज्य के रॉयल्टी, राजस्व और भूमि संबंधी अधिकार खत्म होने की बात सही नहीं है।
मधु कोड़ा ने कहा कि राज्य सरकार को राजस्व बढ़ाने के लिए बंद खदानों को चालू कराने और नीलाम हो चुकी खदानों के संचालन पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि झारखंड में कई कोयला और लौह अयस्क खदानें नीलामी के बाद भी शुरू नहीं हो सकी हैं। इसके विपरीत ओडिशा में खनन गतिविधियां बढ़ने से राज्य को बड़ी मात्रा में राजस्व मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि खनिज राष्ट्रीय संपत्ति हैं और इनके दोहन में राज्य के हित के साथ पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक खनन का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड में खनिजों पर लगाए जा रहे अधिक शुल्क के कारण यहां के छोटे उद्योगों पर भी असर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लौह अयस्क की ऊंची कीमत के कारण कई छोटे उद्योग बंद हुए हैं, जिससे रोजगार प्रभावित हुआ है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य में कोयला, लौह अयस्क और बालू के अवैध खनन पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध खनन से जहां सरकारी राजस्व को नुकसान हो रहा है वहीं अवैध खनन से मिलने वाला लाभ राज्य के भ्रष्ट तंत्रों की जेब में पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को अवैध खनन पर रोक लगाकर वैध खनन को बढ़ावा देना चाहिए। प्रेस वार्ता में भाजपा जिलाध्यक्ष आनंद कुमार सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।
