आउट सोर्सिंग कर्मी

रांची/पलामू, 19 जून राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) और विभिन्न विभागों में आउटसोर्सिंग के तहत कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों ने पांच माह से मानदेय नहीं मिलने के विरोध में शुक्रवार को राज्य के कई जिलों में प्रदर्शन किया। रांची में सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मी जुटे और लंबित भुगतान की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। वहीं पलामू में भी आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने सिविल सर्जन कार्यालय परिसर में धरना देकर बकाया वेतन और स्थायीकरण की मांग उठाई।

प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि लगातार पांच माह से वेतन नहीं मिलने के कारण उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना कठिन हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द भुगतान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, नए वित्तीय वर्ष में लागू ई-वाउचर प्रणाली और एसएनए स्पर्श (SNA SPARSH) प्लेटफॉर्म में तकनीकी समस्याओं के कारण भुगतान प्रक्रिया प्रभावित हुई है। राज्य स्तर से राशि जारी होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर डेटा अपडेट नहीं होने से हजारों कर्मचारियों का मानदेय अटका हुआ है।

कर्मचारियों का दावा है कि इस समस्या से एनएचएम के करीब 15 हजार कर्मी और बड़ी संख्या में सहियाएं प्रभावित हैं। उन्होंने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है।

पलामू में झारखंड अराजपत्रित कर्मचारी संघ के बैनर तले आयोजित धरना में नर्स, एएनएम, सफाईकर्मी, एम्बुलेंस कर्मी तथा अन्य स्वास्थ्यकर्मी शामिल हुए। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि वेतन भुगतान नहीं होने के कारण जामताड़ा की बीमार एएनएम रेखा कुमारी की मौत हो गई। इस घटना को लेकर कर्मचारियों में आक्रोश देखा गया।

संघ की नेता दिव्या भगत ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ माने जाने वाले कर्मचारियों को अपने ही वेतन के लिए धरने पर बैठना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को पहले से ही सीमित वेतन मिलता है और उन्हें नियमित कर्मचारियों की तरह अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।

कर्मचारियों ने प्रशासन के समक्ष पांच माह के बकाया वेतन का तत्काल भुगतान, 10 वर्ष से अधिक समय से कार्यरत कर्मचारियों का स्थायीकरण, न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करने तथा अन्य सेवा सुविधाएं प्रदान करने की मांग रखी।

धरने में एएनएम ममता लकड़ा, अनीता पाल, प्रीति मिंज, सफाईकर्मी पवित्री देवी, सुनीता देवी, सुनैना देवी, एम्बुलेंस कर्मी सौदागर बैठा और अनिल सिंह सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल हुए। झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के सचिव देवनाथ, मुकेश तथा भाकपा-माले के राज्य कमेटी सदस्य अविनाश रंजन समेत अन्य लोगों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की होगी।