भारतीय संस्कृति संसद ने मनायी गीता जयंती
कोलकाता, 30 नवंबर । भारतीय संस्कृति संसद के तत्वावधान में गीता जयंती के अवसर पर विशेष आयोजन किया गया। ‘गीता-सुगीता’ शीर्षक कार्यक्रम में स्वर, वाद्य एवं संगीतमय प्रस्तुतियां दी गई।
इस अभिनव आयोजन का प्रारंभ संस्था की उपाध्यक्षा डॉ तारा दूगड़ के स्वागत भाषण से हुआ। डॉ दूगड़ ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता जीवन व्यवहार की पाठशाला है। इस परिवर्तनशील संसार में जहां कुछ भी स्थायी नहीं है, न सुख ना दुःख, न हमारे शरीर की अवस्थाएं तो क्यों न हम “गीता सुगीता” के माध्यम से जीवनोपयोगी बातों, श्लोकों एवं भजनों को सुन कर जीवन के कुछ क्षणों को कृतार्थ करें।
मंच पर चिन्मय मिशन से पधारे स्वामी दिवाकर चैतन्य जी ने बीच-बीच में गीता के चुने हुए श्लोकों को सस्वर प्रस्तुत किया। स्वामी जी को शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया संस्था अध्यक्ष डॉ बिट्ठलदास मूंधडा ने। गीतों एवं भजनों को धुन प्रदान की संगीत प्राचार्या रमाजी अग्रवाल ने। उनका स्वागत किया मनीषा की अध्यक्षा ऊषा मोदी ने। पदों का पाठ किया नाट्यनिर्देशक एवं लेखक पलाश चतुर्वेदी ने। मनमोहक स्वरों में भजनों की प्रस्तुति ऋचा अग्रवाल एवं मीता गाडोदिया ने दी। कार्यक्रम को सफल बनाने में राज गोपाल सुरेका एवं शंकर लाल सोमानी सक्रिय थे। कार्यक्रम में शिव किशन दमानी, अरुण शर्मा, नीरव शाह, विनोद बागड़ी, अजय अग्रवाल, सुभाष अग्रवाल, सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
