कोलकाता, 12 सितंबर। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को केष्टोपुर में गणेश पूजा का उद्घाटन करते हुए बांग्ला और गैर-बांग्ला के बीच विभाजन की राजनीति पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य में लंबे समय तक सनातनी संस्कृति और परंपराओं की गलत व्याख्या की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब सभी विभेदों को समाप्त कर ‘सनातनी बंगाल’ के निर्माण के लिए काम किया जाएगा।
गणेश पूजा के उद्घाटन के बाद अपने संबोधन में शुभेंदु ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान भाषा, जाति और त्योहारों के नाम पर बंगालियों और सनातनियों को बांटने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि यह धारणा बनाई गई कि गणेश पूजा केवल महाराष्ट्र की परंपरा है, जबकि गणपति बप्पा पूरे देश के सनातनियों के आराध्य हैं। इसी तरह उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा को केवल कोलकाता तक सीमित बताना भी गलत है। छठ पूजा को केवल बिहारियों का पर्व बताने की धारणा पर भी उन्होंने सवाल उठाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाल में रहने वाले सभी समुदायों की अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं हैं और उन्हें किसी क्षेत्र या भाषा की सीमा में बांधना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि अब बांग्ला, गुजराती या अन्य पहचान के नाम पर खड़ी की गई दीवारों को तोड़ दिया गया है और सभी लोग सनातनी तथा हिंदुस्तानी हैं।
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‘धर्म को अफीम कहते थे वामपंथी’
वामपंथी शासन पर निशाना साधते हुए शुभेंदु ने कहा कि 34 वर्षों तक कम्युनिस्टों ने धर्म को ‘अफीम’ बताने की विचारधारा के साथ शासन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान पूजा-पाठ, पंचांग, शास्त्र, पुरोहित और मंत्रोच्चार जैसी सनातनी परंपराओं को कमजोर किया गया। उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा और महालया जैसी परंपराओं से भी लोगों को दूर करने का प्रयास हुआ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वे श्यामा प्रसाद मुखर्जी और स्वामी प्रणबानंद की परंपरा, संस्कृति और विरासत को फिर से स्थापित करना चाहते हैं। उन्होंने विभाजन की त्रासदी का उल्लेख करते हुए कहा कि अविभाजित बंगाल के लोगों को देश के विभाजन से भारी नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय से जुड़े घटनाक्रम का भी उल्लेख किया और कहा कि वहां की परिस्थितियों ने सनातनियों की चिंताओं को बढ़ाया है।
शुभेंदु ने तृणमूल कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों के शासन के शुरुआती दौर में भले ही ऐसा नहीं हुआ हो, लेकिन बाद के वर्षों में बंगाल की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को बदलने की कोशिश की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि एक वर्ष मुहर्रम के कारण विजयादशमी के दिन प्रतिमा विसर्जन की तिथि में बदलाव किया गया था।
उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों की तिथियां पंचांग और परंपराओं के अनुसार ही तय होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अब पूजा उद्घाटन पितृपक्ष में करने जैसी परंपराएं स्वीकार नहीं की जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने लोगों से अपनी पहचान, धर्म, संस्कार और परंपराओं की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सभी को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान तथा परंपराओं को बदल न सके।
