गंगा को बचाने के लिए हर व्यक्ति को निभानी होगी जिम्मेदारी – गोयनका
मत्स्य बीज, जल पात्र और घोसलों का वितरण
ओंकार समाचार
कोलकाता / आरामबाग, 31 मई। पर्यावरण संरक्षण, गंगा नदी की स्वच्छता और जैव विविधता के संवर्धन का संदेश देने के उद्देश्य से रविवार को गंगा मिशन की ओर से एक अनूठे ‘मीन मंगल उत्सव’ का आयोजन किया गया। हुगली जिले के तारकेश्वर स्थित बाबा तारकनाथ मंदिर के निकट हनुमान प्रसाद मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में लोगों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया।
इस अवसर पर पर्यावरण एवं जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए पक्षियों के लिए घोंसलों का वितरण किया गया। गर्मी के मौसम में पक्षियों को पेयजल उपलब्ध कराने हेतु जलपात्र वितरित किए गए तथा मत्स्यजीवियों को मछली के बीज (फिश सीड) प्रदान किए गए।

उत्सव की शुरुआत गंगा मिशन द्वारा आयोजित नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर से हुई। , जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय जरूरतमंद और आम लोगों ने स्वास्थ्य परीक्षण तथा प्राथमिक चिकित्सा सेवाओं का लाभ उठाया।
कार्यक्रम में गंगा मिशन के प्रमुख कार्यकर्ता प्रह्लाद राय गोयनका, समाजसेवी सुशील चौधरी, जगदीश प्रसाद सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। वक्ताओं ने गंगा नदी के महत्व तथा पर्यावरण संरक्षण में आमजन की भूमिका पर विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर प्रह्लाद राय गोयनका ने कहा कि गंगा केवल नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और जीवन का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण, प्लास्टिक कचरे और लोगों की असावधानी के कारण गंगा की प्राकृतिक संरचना गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। गंगा को बचाने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने नदी में प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट फेंकने से बचने तथा प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए जनजागरण की आवश्यकता पर बल दिया।
गोयनका ने कहा कि गंगा पर असंख्य जलीय जीवों, पक्षियों और लाखों लोगों की आजीविका निर्भर है। इसलिए गंगा की सेहत को सुरक्षित रखना प्रकृति और समाज दोनों के हित में है।
समाजसेवी सुशील चौधरी ने पक्षियों के लिए घोंसले वितरित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तेजी से हो रहे वृक्षों के कटाव, शहरीकरण और प्राकृतिक आवासों के नष्ट होने से कई पक्षी प्रजातियां संकट का सामना कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पक्षी केवल प्रकृति की सुंदरता नहीं बढ़ाते, बल्कि कीट नियंत्रण, बीज प्रसार और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने लोगों से अपने घरों, विद्यालयों, मंदिरों और आसपास के पेड़ों पर पक्षियों के लिए घोंसले और जलपात्र लगाने की अपील करते हुए कहा कि इससे उनके संरक्षण में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ और हरित पर्यावरण देने के लिए पक्षियों, नदियों और प्रकृति का समान रूप से संरक्षण आवश्यक है।
उपस्थित विशिष्टजनों ने कहा कि पर्यावरण जागरूकता पर केंद्रित यह मीन मंगल उत्सव केवल एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि गंगा नदी की स्वच्छता, जैव विविधता संरक्षण और प्राकृतिक संतुलन की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक अभियान का रूप ले चुका है। आयोजकों ने आशा व्यक्त की कि यह पहल आम लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

स्वास्थ्य शिविर में 400 से अधिक मरीजों ने उठाया लाभ
इस अवसर पर आयोजित स्वास्थ्य शिविर में लगभग 400 मरीजों का उपचार किया गया। शिविर में आए मरीजों की ब्लडप्रेशर, ब्लडशुगर, ईसीजी आदि जांचें की गई। मरीजों को जरूरत के अनुसार दवाओं का वितरण निशुल्क किया गया।
नेत्रजांच के दौरान 120 मरीजों की नजर कमजोर पाई गई जिन्हें चश्मे निःशुल्क वितरित किए जाएंगे। 30 मरीजों को मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए चिन्हित किया गया, जिनके ऑपरेशन आगामी 30 जून को मारवाड़ी रिलीफ सोसायटी अस्पताल में निशुल्क किए जाएंगे।
गंगा मिशन के प्रतिनिधि ज्योतिसिंह ने बताया कि गंगामिशन के राष्ट्रीय महा सचिव प्रह्लाद रॉय गोयनका की प्रेरणा से आयोजित इस शिविर को सफल बनाने में डॉ. प्रशांत पाल, डॉ. एम. के. राय, अंजलि यादव का योगदान सराहनीय रहा।
