लक्ष्मी पूजा से पहले फूलों की कीमतें नियंत्रित, मिट्टी की महंगाई से कुम्हार परेशान

मेदिनीपुर, 25 अक्टूबर । पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर जिले में कोजागरी लक्ष्मी पूजा की तैयारियां तेज हो गई हैं। घर-घर में होने वाली पूजा के लिए बाजारों में फूलों की खरीदारी बढ़ गई है। इस बार फूलों की अच्छी पैदावार और पर्याप्त आपूर्ति के कारण कीमतें सामान्य लोगों की पहुंच में बनी हुई हैं। इससे जहां मध्यम वर्ग के परिवारों को राहत मिली है, वहीं फूल बेचकर किसान भी संतुष्ट हैं। दूसरी ओर, मिट्टी की कीमतों में भारी वृद्धि और कच्चे माल की कमी से लक्ष्मी प्रतिमा बनाने वाले कुम्हारों की परेशानी बढ़ गई है।

जिले के कोलाघाट, देउलटी और केशापाट सहित विभिन्न फूल बाजारों में शनिवार को अच्छी चहल-पहल रही। बाजार में कमल, गेंदा, रजनीगंधा, गुलाब और अपराजिता सहित विभिन्न फूल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।

बंगाल फूल उत्पादक एवं फूल व्यवसायी समिति के महासचिव नारायणचंद्र नायक के अनुसार, इस वर्ष फूलों की खेती वाले क्षेत्रों में बड़ी बाढ़ नहीं आने के कारण उत्पादन अच्छा हुआ है। बाजार में पर्याप्त आपूर्ति रहने से कीमतें भी नियंत्रण में हैं।

फूल व्यापारियों के अनुसार, कोलाघाट और देउलटी के बाजारों में एक कमल 10 से 12 रुपये में बिक रहा है। रजनीगंधा के छोटे फूलों की कीमत लगभग 400 रुपये प्रति किलो है, जबकि 24 डंडियों का एक गुच्छा 250 रुपये में मिल रहा है। एक गुलाब की कीमत साढ़े तीन रुपये है। अपराजिता 60 से 70 रुपये और दोपाटी 40 से 50 रुपये प्रति किलो बिक रही है। लाल गेंदा के छोटे फूल 60 से 70 रुपये तथा बसंती गेंदा 100 से 120 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। तीन फुट की लाल गेंदे की माला 10 से 12 रुपये और बसंती गेंदे की माला 15 से 18 रुपये में उपलब्ध है।

हालांकि, फूलों के बाजार में राहत के बीच लक्ष्मी प्रतिमा बनाने वाले कुम्हारों के सामने कच्ची मिट्टी की कमी बड़ी समस्या बन गई है। मेदिनीपुर शहर के खयरुल्लाचक क्षेत्र के कलाकारों के अनुसार, प्रतिमा बनाने के लिए मुख्य रूप से डायमंड हार्बर और दक्षिण 24 परगना के विभिन्न क्षेत्रों से मिट्टी मंगानी पड़ती है। पिछले वर्ष एक गाड़ी मिट्टी की कीमत लगभग 25 हजार रुपये थी, जो इस बार बढ़कर 50 से 60 हजार रुपये हो गई है। इसके बावजूद पर्याप्त मिट्टी नहीं मिल रही है।

कलाकार अनुभव दास ने बताया कि पहले वह 500 से अधिक सांचे वाली लक्ष्मी प्रतिमाएं बनाते थीं, लेकिन इस बार उत्पादन घटाना पड़ा है। छोटी प्रतिमाओं की थोक कीमत पिछले वर्ष 90 से 110 रुपये थी, जो इस बार बढ़कर 150 से 160 रुपये हो गई है। कलाकार अरुणिमा पाल भी मिट्टी की कमी के कारण पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम प्रतिमाएं बना पाई हैं। इसका असर उनकी आमदनी पर पड़ने की आशंका है। मिट्टी के दीये और कुल्हड़ बनाने वाले कलाकार भी इस संकट से प्रभावित हैं।