नई दिल्ली, 03 नवंबर । लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को कहा कि जनता के हर पैसे का स्पष्ट हिसाब होना चाहिए और इसका इस्तेमाल पूरी तरह से अपने निर्धारित उद्देश्यों के लिए होना चाहिए।
ओम बिरला ने तिरुवनंतपुरम में संसद और राज्य, केंद्रशासित प्रदेशों के विधानमंडलों की ‘लोक लेखा समितियों (पीएसी) के पीठासीन अधिकारियों के दो दिवसीय सम्मेलन’ का उद्घाटन के अवसर पर यह बात कही। उन्होंने सार्वजनिक धन की निगरानी, संसदीय जवाबदेही और वित्तीय जांच में एआई जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया। यह कार्यक्रम “ऑडिट, जवाबदेही और सुशासन- पीएसी की बदलती भूमिका” विषय पर आधारित है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, “सार्वजनिक धन की सुरक्षा के मामले में राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार किया जाना चाहिए। पीएसी अध्यक्ष के रूप में विपक्ष के सदस्य को नियुक्त करने की लोकतांत्रिक परंपरा का भारतीय संसदीय लोकतंत्र की परिपक्वता को दर्शाता है। समिति का उद्देश्य किसी सरकार की आलोचना करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक धन का दुरुपयोग या लीकेज न हो और कार्यपालिका जनता के प्रति जवाबदेह रहे। सरकारी खर्च का आकलन सिर्फ आंकड़ों और ‘उपयोगिता प्रमाण पत्र’ तक सीमित नहीं रहना चाहिए। सदस्यों को बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की गुणवत्ता और सामाजिक कल्याण योजना के वास्तविक असर को जांचने के लिए प्रोजेक्ट साइट का दौरा भी करना चाहिए।”
बदलते दौर में निगरानी के तरीकों को आधुनिक बनाने पर जोर देते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि खर्च के बड़े डेटा का विश्लेषण करने, वित्तीय गड़बड़ियों को पहचानने और ऑडिट की निगरानी के लिए एआई, डेटा एनालिटिक्स और आधुनिक तकनीक का लाभ उठाया जाना चाहिए।
संसद की पीएसी के अध्यक्ष केसी वेणुगोपाल ने संसदीय जांच को परिणाम-केंद्रित बनाने पर जोर दिया। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि संसद के हर सत्र में कम से कम एक पीएसी रिपोर्ट और उस पर सरकार की ओर से की गई कार्रवाई पर अनिवार्य रूप से चर्चा होनी चाहिए। वेणुगोपाल ने बड़ी बुनियादी परियोजनाओं और फ्लैगशिप कल्याणकारी कार्यक्रमों के समयबद्ध ऑडिट पर भी जोर दिया।
इस दौरान पीएसी कॉन्फ्रेंस की स्मारिका का भी विमोचन किया गया। इस अवसर पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन, केरल विधानसभा के अध्यक्ष थिरुवंचूर राधाकृष्णन और विधानसभा की पीएसी के अध्यक्ष केएन बालगोपाल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।–
