पश्चिमी सिंहभूम, 07 जनवरी। पश्चिमी सिंहभूम जिले के अति नक्सल प्रभावित कत्र नोआमुंडी प्रखंड अंतर्गत जेटेया पंचायत के बाबरिया गांव में मंगलवार रात जंगली हाथी के हमले में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना में पति-पत्नी और उनके तीन मासूम बच्चों ने अपनी जान गंवा दी। जबकि परिवार का केवल एक बच्चा किसी तरह बच पाया। वन विभाग ने घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण वनविभाग के लोग यहां बुधवार तक नहीं पहुंच पाए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतकों में सनातन मेराल, उनकी पत्नी जोंकों कुई, उनके दो छोटे बच्चे तथा उसी गांव के मोगदा लागुरी शामिल हैं। बताया जाता है कि सभी लोग रात के समय अपने घर में सो रहे थे, तभी जंगली हाथी ने हमला कर घर को तोड़ दिया। एक ही घर में माता-पिता और बच्चों के शवों को देखकर गांव वालों की रूह कांप उठी। घटना के बाद बाबरिया गांव में मातम पसरा है और हर आंख नम है।
हाथी का आतंक केवल बाबरिया गांव तक सीमित नहीं रहा। इसी दौरान बड़ा पासीया गांव में भी एक ग्रामीण की जान चली गई, जबकि लांपाईसाई गांव में एक अन्य ग्रामीण को हाथी ने रौंदकर मार डाला। इन दोनों गांवों में मृतकों की पहचान अभी नहीं हो पाई है, लेकिन घटनाओं का तरीका एक जैसा है—रात का समय, घर के भीतर सोते ग्रामीण और अचानक मौत।
स्थानीय लोगों के अनुसार बीते दस दिनों में कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में हाथी के हमलों से 20 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक न तो किसी आपात स्थिति की घोषणा हुई है और न ही कोई ठोस व प्रभावी कार्रवाई नजर आ रही है। इससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश और भय व्याप्त है।
कोल्हान, सारंडा और आसपास के वनवर्ती गांवों में हालात बेहद भयावह हो चुके हैं। कई गांवों के लोग रात होते ही अपने घर छोड़ने को मजबूर हैं। बुंडू जैसे इलाकों के ग्रामीण जान बचाने के लिए रोवाम और अन्य अपेक्षाकृत सुरक्षित गांवों में शरण ले रहे हैं। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग ठंड के इस मौसम में खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं।
जंगली हाथियों का आतंक, फसलें और घर क्षतिग्रस्त
पूर्वी सिंहभूम : पूर्वी सिंहभूम जिला के चाकुलिया प्रखंड में मंगलवार रात पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे सरडीहा पंचायत के बांकशोल गांव में दो जंगली हाथी घुस आए। रात में गांव में दाखिल हुए हाथियों ने करीब दो घंटे तक जमकर उत्पात मचाया, जिससे पूरे गांव में दहशत का माहौल बन गया।
हाथियों के गांव में घुसते ही लोग जान बचाने के लिए घरों से बाहर निकलकर छतों पर चढ़ गए। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में खासा डर देखा गया। ग्रामीण लगातार शोर मचाकर और टॉर्च की रोशनी से हाथियों को भगाने की कोशिश करते रहे, लेकिन हाथी देर रात तक गांव में डटे रहे।
इस दौरान हाथियों ने गांव के किसान जीवन चंद्र मुर्मू और चुनू मुर्मू की करेला की तैयार फसल को रौंदकर पूरी तरह नष्ट कर दिया। किसानों के अनुसार फसल कटाई के करीब थी और नुकसान से उनकी मेहनत पर पानी फिर गया। इसके अलावा हाथियों ने निमू रंजन मुर्मू के घर को भी निशाना बनाया, जहां दीवार और अन्य हिस्सों को नुकसान पहुंचा। सौभाग्य से इस घटना में किसी व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है।
ग्रामीणों ने बताया कि काफी देर तक गांव में उत्पात मचाने के बाद दोनों हाथी अंततः पश्चिम बंगाल की सीमा में स्थित चांदुआ जंगल की ओर चले गए। हाथियों के जाने के बाद ही लोगों ने राहत की सांस ली और अपने घरों से बाहर निकल सके।
घटना की सूचना वन विभाग को दी गई है। ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने, हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने और फसल और संपत्ति के नुकसान का मुआवजा देने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सीमावर्ती इलाका होने के कारण हाथियों का आना-जाना अक्सर बना रहता है, जिससे किसानों और ग्रामीणों को लगातार खतरे का सामना करना पड़ रहा है।
