रांची विश्वविद्यालय की नई कुलपति डॉ. सरोज शर्मा ने संभाला पदभार

रांची, 14अप्रैल। रांची विश्वविद्यालय की नवनियुक्त कुलपति डॉ. सरोज शर्मा ने मंगलवार को पदभार ग्रहण करने के बाद अपने कार्यों की शुरुआत श्रद्धांजलि अर्पित कर की। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर स्थित परफॉर्मिंग एंड फाइन आर्ट्स विभाग में बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।

कुलपति ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की पावन धरती पर आना उनके लिए गौरव का क्षण है और उनके आशीर्वाद से कार्य प्रारंभ करना उन्हें नई ऊर्जा और प्रेरणा देता है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार की ओर से उनका स्वागत पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र देकर किया गया।

इसके बाद कुलपति लॉ विभाग (आईएलएस) पहुंचीं, जहां डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने देश को समतामूलक समाज, सशक्त संविधान और सफल लोकतंत्र की अमूल्य देन दी है। उनके विचार आज भी देश के लिए मार्गदर्शक हैं।

इस मौके पर उन्होंने कहा कि भारत का समतामूलक समाज, सशक्त संविधान और सफल लोकतंत्र बाबा साहेब की अमूल्य देन है। उनके विचारों और कार्यों के कारण ही देश अपने लोकतांत्रिक मूल्यों पर गर्व करता है और हम सभी उनके प्रति सदैव ऋणी रहेंगे।

कुलपति ने सभी को बाबा साहेब की जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आईएलएस विभाग का संविधान से विशेष संबंध है, इसलिए आने वाले वर्षों में 14 अप्रैल को डॉ. अंबेडकर की जयंती को और अधिक गरिमा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा।

राज्यपाल-सह-कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार से लोक भवन में शिष्टाचार भेंट

में कुलपति डॉ. सरोज शर्मा ने राज्यपाल-सह-कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार से लोक भवन में शिष्टाचार भेंट की। राज्यपाल ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में रांची विश्वविद्यालय नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

राज्यपाल ने कहा कि वे उच्च शिक्षा में गुणात्मक विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि रांची विश्वविद्यालय राज्य का सबसे पुराना विश्वविद्यालय है। उन्होंने यह भी कहा कि वे चाहते हैं कि राज्य में उच्च शिक्षा का ऐसा वातावरण स्थापित हो, जिससे अन्य राज्यों के विद्यार्थी भी यहां शिक्षा ग्रहण करने के लिए आकर्षित हों तथा यहां के विश्वविद्यालयों की गणना राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट संस्थानों में हो।

 

राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ अनुशासन, शैक्षणिक उत्कृष्टता एवं शोध गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर भी बल दिया।