ओंकार

रांची, 25 फरवरी। झारखंड के राज्‍यपाल संतोष कुमार गंगवार ने बुधवार को झारखण्ड राय विश्वविद्यालय, रांची के छठे दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक यात्रा का समापन नहीं, बल्कि एक नई जीवन-यात्रा का शुभारंभ है।

राज्यपाल ने कहा कि यह उपलब्धि विद्यार्थियों के कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, नैतिक मूल्यों का विकास और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ करना है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान एवं कौशल का उपयोग राष्ट्र और समाज के कल्याण में करने का आह्वान किया।

राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” का मंत्र देश को नई दिशा दे रहा है। ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्टार्टअप इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों ने युवाओं को रोजगार खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजक बनने की प्रेरणा दी है।

राज्यपाल ने कहा कि विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल तकनीक, हरित ऊर्जा और नवाचार जैसे क्षेत्र नए अवसर प्रदान कर रहे हैं। नई दिल्ली में आयोजित वैश्विक एआई सम्मेलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत तकनीकी नेतृत्व की दिशा में सशक्त रूप से आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में निरंतर सीखने की प्रवृत्ति, अनुकूलन क्षमता और रचनात्मक सोच युवाओं की सबसे बड़ी ताकत होगी।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे केवल पेशेवर सफलता तक सीमित न रहें, बल्कि ईमानदारी, करुणा, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करें। प्रतिष्ठा पद से नहीं, बल्कि कर्म और चरित्र से प्राप्त होती है।

राज्यपाल ने कहा कि झारखंड केवल प्राकृतिक संसाधनों की भूमि नहीं, बल्कि संघर्ष, संस्कृति और संभावनाओं की धरती है। यदि युवा अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग राज्य के विकास में करेंगे, तो झारखंड देश के अग्रणी राज्यों में स्थान प्राप्त कर सकता है।

 

उन्होंने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहन देने तथा नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने इच्छा व्यक्त की कि राज्य के विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट संस्थानों की श्रेणी में स्थान प्राप्त करें।

अंत में राज्यपाल ने विद्यार्थियों से बड़े सपने देखने, निरंतर परिश्रम करने और असफलताओं से सीख लेकर आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास, धैर्य और प्रतिबद्धता से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रहता।