पुस्‍तक विमोचन

कोलकाता, 16 सितंबर। गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर लीगल रिलीफ सोसायटी  की ओर से वसीयत, उत्तराधिकार, प्रोबेट और एस्टेट प्लानिंग जैसे महत्वपूर्ण कानूनी विषयों पर आधारित पुस्तक ‘Wills & Bequests – Vision to Action’ गणेश भगवान को समर्पित की गई।

हमारे देश में संपत्ति के उत्तराधिकार से जुड़े मामले कई बार स्पष्टता, सही रणनीति और समय पर कानूनी कार्रवाई के अभाव में जटिल हो जाते हैं। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए पुस्तक को तैयार किया गया है।

यह पुस्तक का आम नागरिकों तथा साथ-साथ अधिवक्ताओं, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, कर सलाहकारों और अन्य पेशेवरों को वसीयत एवं संपत्ति के उत्तराधिकार संबंधी प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए लिखी गई है।

कलकत्ता हाई कोर्ट के अधिवक्‍ता आर.डी. काकरा पुस्तक के लेखक एवं संपादक हैं, जबकि अधिवक्ता मधुसूदन काकरा ने पुस्तक के निर्माण में सहयोग किया है। इसकी प्रस्‍सतावना सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेश बिंदल ने लिखी है।

पुस्तक में वसीयत और उत्तराधिकार से जुड़े कानूनी प्रावधानों को केवल सैद्धांतिक रूप में प्रस्तुत करने के बजाय व्यावहारिक सवाल-जवाब के माध्यम से समझाने का प्रयास किया गया है। पुस्तक में 19 अध्यायों में 405 प्रश्नोत्तर तथा 36 मॉडल नमूने (स्पेसिमेंस) शामिल किए गए हैं। इसके माध्यम से वसीयत तैयार करने से लेकर उसके क्रियान्वयन, प्रोबेट और उत्तराधिकार से जुड़ी विभिन्न प्रक्रियाओं को सरल तरीके से समझाया गया है।

पुस्तक में वैध वसीयत कैसे बनाई जाए, प्रोबेट, प्रोबेट टू पजेशन, बिना वसीयत के उत्तराधिकार (Intestate Succession), डिजिटल विरासत, वसीयत के माध्यम से ट्रस्ट का गठन, HUF के संबंध में वसीयत, निवासी प्रतिनिधियों एवं एग्जीक्यूटर्स का कराधान, कैपिटल गेन्स, टेस्टामेंटरी ट्रस्ट, अनिवासी भारतीयों से जुड़े विषय तथा प्रोबेट के बाद की कानूनी कार्रवाई जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण एवं मार्गदर्शक फैसलों का भी संदर्भ दिया गया है।

न्यायमूर्ति राजेश बिंदल ने प्रस्‍तावना में पुस्तक को उत्तराधिकार कानून से संबंधित लोगों के लिए उपयोगी संदर्भ ग्रंथ बताते हुए कहा है कि यह अधिवक्ताओं के पुस्तकालय में संदर्भ सामग्री, कर सलाहकारों के लिए मार्गदर्शिका और आम नागरिकों के लिए विषय को समझने में सहायक साबित हो सकती है