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कोलकाता, 11 सितंबर । कोलकाता में अवैध बहुमंजिला इमारतों के निर्माण की आड़ में करोड़ों रुपये के काले धन को सफेद किए जाने के आरोपों को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट ने शुक्रवार को गंभीर रुख अपनाया। मामले की प्रारंभिक जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपते हुए अदालत ने 14 अक्टूबर तक प्रारंभिक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि जांच के दौरान आवश्यकता पड़ने पर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन भी किया जा सकता है।

मामले में राजाबाजार, बेलियाघाटा, कैनाल स्ट्रीट, मानिकतला समेत कोलकाता के विभिन्न इलाकों में कम से कम 55 बहुमंजिला इमारतों के अवैध तरीके से बनाए जाने का आरोप लगाया गया है। याचिका में कहा गया है कि इनमें से अधिकांश निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। कई इमारतों के वास्तविक मालिकों की पहचान भी स्पष्ट नहीं होने का आरोप है। इन निर्माणों के जरिए करोड़ों रुपये के काले धन को सफेद किए जाने की आशंका भी जताई गई है।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने कोलकाता नगर निगम की भूमिका पर भी सवाल उठाए। मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि स्थानीय लोगों की ओर से बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद अब तक अवैध निर्माण के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि नगर निगम इतने समय तक हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठा रहा।

सुनवाई के दौरान कोलकाता नगर निगम की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित मामले में विस्तृत जानकारी एकत्र कर रिपोर्ट दाखिल की जाएगी। इस पर खंडपीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह की प्रक्रिया के जरिए मामले को टालने या समय बर्बाद करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। अदालत ने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर नगर निगम के आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में तलब किया जा सकता है।

अदालत ने यह भी पूछा कि शहर में अवैध निर्माण रोकने के लिए पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार के दौरान गठित टास्क फोर्स ने अब तक क्या कार्रवाई की। राज्य सरकार की ओर से टास्क फोर्स गठित करने के निर्देश के बाद अवैध निर्माण से जुड़ी समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाए गए, इसकी जानकारी भी अदालत ने मांगी।

खंडपीठ ने सीबीआई को उपलब्ध प्रारंभिक दस्तावेजों की जांच करने के साथ-साथ कोलकाता नगर निगम और पुलिस से आवश्यक जानकारी हासिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि जांच के दौरान यदि आवश्यक महसूस हो तो सीबीआई अपनी सहायता के लिए एसआईटी का गठन कर सकती है। मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी और उससे पहले सीबीआई को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी।