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कोलकाता, 23 जुलाई । तृणमूल कांग्रेस के नेता एवं डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी को पश्चिम बंगाल में दर्ज विभिन्न आपराधिक मामलों में एक साथ व्यापक कानूनी संरक्षण (कंबाइंड प्रोटेक्शन) देने से कलकत्ता हाईकोर्ट ने फिलहाल इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने गुरुवार को मामले की सुनवाई के बाद अगली सुनवाई 30 जुलाई को निर्धारित की।

अभिषेक बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में दलील दी कि राजनीतिक प्रतिशोध के तहत भवानीपुर, सिलीगुड़ी, नकाशीपाड़ा, बिष्णुपुर समेत राज्य के विभिन्न थानों में उनके मुवक्किल के खिलाफ आठ एफआईआर दर्ज की गई हैं। उन्होंने कहा कि पहले एक मामले में अदालत से संरक्षण मिल चुका है, इसलिए शेष मामलों में भी एक साथ व्यापक राहत दी जानी चाहिए।

सुनवाई के दौरान सिब्बल ने विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी को पूर्व में मिली न्यायिक राहत का भी हवाला दिया। इस पर राज्य सरकार के वकील ने कहा कि वह केवल एक अंतरिम आदेश था, न कि सभी मामलों में व्यापक संरक्षण। अदालत ने भी स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी अन्य नेता का उदाहरण नहीं दिया जाए।

न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने सभी मामलों को एक साथ जोड़कर संरक्षण देने की मांग खारिज करते हुए कहा कि हर एफआईआर अलग-अलग आरोपों और तथ्यों पर आधारित है, इसलिए सभी मामलों में एक समान राहत देना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

हालांकि अदालत ने निर्देश दिया कि 30 जुलाई तक यदि अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई की जाती है, तो उसे तत्काल अदालत के संज्ञान में लाया जा सकता है। फिलहाल उन्हें सभी मामलों में एक साथ कोई व्यापक अंतरिम राहत नहीं मिली है।