हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

रजरप्पा, दामोदर,  स्वर्णरेखा, खरकई और कारो नदी के घाट पर हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

रांची, 5 नवंबर। कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर बुधवार को पूरे झारखंड में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। राज्यभर के मंदिरों, नदियों और घाटों पर तड़के से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। किसी ने पवित्र नदियों में डुबकी लगाई तो किसी ने दीपदान कर अपने परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।

रजरप्पा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

रामगढ़ जिले के प्रसिद्ध मां छिन्नमस्तिका मंदिर (रजरप्पा) में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं की अपार भीड़ देखी गई। तड़के से ही मंदिर में भक्तों की कतार लग गई। स्नान-दान की पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने भैरवी नदी में पवित्र स्नान कर मां छिन्नमस्तिका का दर्शन किया और आशीर्वाद प्राप्त किया।

मंदिर के पुजारी सुभाषीश पंडा ने बताया कि इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर अत्यंत शुभ संयोग बना है। देव दीपावली के दिन मां छिन्नमस्तिका की विशेष पूजा-अर्चना की परंपरा है। इस अवसर पर झारखंड के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, ओड़िशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

धनबाद : दामोदर तट पर हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

धनबाद में कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर मोहलबनी और लाल बंगला घाट पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही “हर हर गंगे” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

धनबाद, झरिया, सुदामडीह, डिगवाडीह, पाथरडीह, जोरापोखर और अन्य क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु पवित्र स्नान-दान के लिए पहुंचे। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने मुक्तिधाम स्थित मां काली, हनुमान और शिव मंदिरों में पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और दान सामग्री वितरित कर पुण्य अर्जित किया।

जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा, साफ-सफाई और स्वास्थ्य सुविधा के व्यापक इंतज़ाम किए गए थे। घाटों पर मेला जैसा माहौल रहा — झूले, खिलौने और खान-पान के स्टॉलों ने माहौल को उल्लासपूर्ण बना दिया।

जमशेदपुर : दोमुहानी संगम स्थल पर दीपदान और पूजन

पूर्वी सिंहभूम जिले के दोमुहानी संगम स्थल (जहां स्वर्णरेखा और खरकई नदियों का संगम होता है) पर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर हजारों श्रद्धालु पहुंचे। ब्रह्म मुहूर्त से ही घाटों पर स्नान के लिए लंबी कतारें लग गईं। महिलाएं और पुरुष पारंपरिक परिधानों में दीपदान करते नजर आए।

स्नान के बाद भक्तों ने भगवान विष्णु और शिव की पूजा की तथा तिल, चावल, फल और वस्त्र का दान किया। पंडित आर.के. मिश्रा ने बताया कि कार्तिक मास में भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं, इसलिए इस माह में स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व है।

पश्चिमी सिंहभूम : कारो नदी के घाटों पर दीपोत्सव का दृश्य

गुवा बाजार स्थित कारो नदी के तट पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। महिलाएं केले के पत्तों और कागज से बनी छोटी नावों में दीप जलाकर नदी में प्रवाहित करती रहीं। श्रद्धालुओं ने कुसुम घाट स्थित शिव मंदिर में दूध, बेलपत्र और गंगाजल अर्पित किया।

“हर हर महादेव” और “जय श्री हरि” के जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा। घाटों पर प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे।

धार्मिक मान्यता और महत्व

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान कर ध्यान और दान करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। जहां गंगा नहीं बहती, वहां श्रद्धालु अन्य पवित्र नदियों में स्नान कर समान पुण्य अर्जित करते हैं।

यह दिन त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसी दिन भगवान शिव ने असुर त्रिपुरासुर का संहार कर देवताओं को विजयी बनाया था।

राज्यभर के घाटों पर दीपों की झिलमिलाहट, घंटियों की ध्वनि और भक्तों की प्रार्थनाओं से भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम दिखाई दिया। कार्तिक पूर्णिमा ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि आस्था, सद्भाव और सेवा का संगम ही जीवन का सच्चा उत्सव है।