दो पक्षों में खूनी संघर्ष

हजारीबाग, 17 अक्टूबर । हजारीबाग जिले के कटकमदाग थाना क्षेत्र के बनहा गांव में शुक्रवार को मदरसा मजहरुल उलूम और जामा मस्जिद की जमीन को लेकर एक ही समुदाय के दो पक्षों के बीच जोरदार झड़प हो गई। जमीन पर कब्जे के विवाद ने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया। दोनों ओर से लाठी-डंडे और पत्थर चले, जिसमें 12 लोग घायल हो गए। सभी घायलों का इलाज शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा है।

मदरसा पक्ष के घायलों में मोहम्मद नेजामुद्दीन, मो. गुलाम मुर्तुजा (सदर, बनहा अंजुमन), मो. सोहैल, मो. रसीद, मो. मिनहाज शामिल हैं,जबकि दूसरे पक्ष के घायलों मो. हासिम, मो. हसन, हामिद रजा, कविजा खारुन, गुलशन और फातमा का नाम शामिल है। घटना में दोनों पक्षों ने प्रशासन से न्याय की मांग की है।

मदरसा पक्ष के मो. नोजाम (पिता कैलू मियां) ने कटकमदाग थाना में आवेदन देकर बताया कि शुक्रवार को उन्हें सूचना मिली कि मदरसा की जमीन पर जबरन कब्जा किया जा रहा है। सूचना मिलते ही अंजुमन के सदर मो. मुर्तुजा, सचिव मो. अख्तर, मो. बाबर और मो. मिनहाज के साथ मौके पर पहुंचे। आरोप है कि जब उन्होंने मो. हामिम (पिता-रसुकी मियां) और उसके परिवार से पूछताछ की, तो विवाद बढ़ गया और दूसरी ओर से धारदार हथियारों से हमला कर दिया गया। हमले में अंजुमन के सदर मो. मुर्तुजा गंभीर रूप से घायल हो गए और मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़े। बचाव में पहुंचे अन्य लोगों पर भी पथराव हुआ, जिससे कई ग्रामीण घायल हुए।

दूसरे पक्ष का कहना है कि उन्होंने यह जमीन वैध रूप से खरीदी है और उस पर चाहरदीवारी का निर्माण कर रहे थे। उनका आरोप है कि जब उन्होंने मदरसा पक्ष से जमीन के दस्तावेज मांगे, तो उन्होंने ही पहले हमला कर दिया। मदरसा अंजुमन के सदर मो. मुर्तुजा ने कहा कि विवादित भूमि वक्फ बोर्ड की संपत्ति है और मदरसा के नाम पर दर्ज है। उन्होंने आरोप लगाया कि हमला पूर्व नियोजित था और मदरसा प्रबंधन के सदस्यों की जान लेने की कोशिश की गई।

इस बीच घटना की जानकारी मिलते ही कटकमदाग थाना प्रभारी प्रमोद कुमार राय पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को शांत कराया। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने थाने में आवेदन दिया है और पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह भूमि विवाद से जुड़ा मामला है, जिसकी निष्पक्ष जांच की जाएगी।

मदरसा प्रबंधन ने वक्फ बोर्ड से हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा है कि धार्मिक संपत्ति की रक्षा की जाए और गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखी जाए।