नई दिल्ली, 15 अक्टूबर। सुप्रीम कोर्ट ने 6,210.72 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कॉनकास्ट स्टील एंड पावर लिमिटेड के मालिक और उद्योगपति संजय सुरेका को बुधवार को जमानत दे दी है। न्यायालय ने यह राहत मामले की लंबी सुनवाई की संभावना और करीब 98 गवाहों के बयान दर्ज किए जाने के मद्देनजर दी है।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पांचोली की पीठ ने निर्देश दिया कि सुरेका निचली अदालत की संतुष्टि के अनुरूप जमानत बॉंड भरें और निर्धारित शर्तों का पालन करें। पीठ ने स्पष्ट किया कि मुकदमे की सुनवाई लंबित रहने तक अपीलकर्ता को हिरासत की कठोरता का सामना नहीं करना चाहिए।
शर्तों के साथ मिली राहत
अदालत ने जमानत के साथ कई सख्त शर्तें भी लगाई हैं। शर्तों के तहत सुरेका को अपना पासपोर्ट निचली अदालत में जमा कराना होगा। सुनवाई पूरी होने तक वे अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जा सकेंगे। वे गवाहों को प्रभावित करने अथवा सबूतों से छेड़छाड़ करने से पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। अदालत ने चेतावनी दी है कि इनमें से किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर निचली अदालत उनकी जमानत रद्द कर सकती है।
जानिये यह है पूरा मामला
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुसार, संजय सुरेका पर बैंकों से भारी-भरकम ऋण हासिल करने के लिए अपनी कंपनी का कारोबार बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने और कथित तौर पर शेल कंपनियों के माध्यम से धन का अन्यत्र उपयोग करने का आरोप है।
जांच में यह भी सामने आया कि कथित अपराध से अर्जित आय की कुल राशि 6,210.72 करोड़ रुपये है, जिसमें से अब तक 777.10 करोड़ रुपये की संपत्ति धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत कुर्क की जा चुकी है। आरोप है कि इस अवैध नेटवर्क को चलाने के लिए 62 शेल कंपनियां बनाई गई थीं, जिनमें 34 लोगों को डमी निदेशक नियुक्त किया गया था। इस मामले में ईडी ने 18 दिसंबर 2024 को सुरेका को गिरफ्तार किया था।
