रांची, 03 अक्टूबर। आदिवासी समाज के संवैधानिक, लोकतांत्रिक, सामाजिक और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से आदिवासी लोकतांत्रिक अधिकार मोर्चा की बैठक शनिवार को रांची में हुई। बैठक की अध्यक्षता बंधु तिर्की ने की। इसमें संगठन के विस्तार, आदिवासी समाज से जुड़े प्रमुख मुद्दों और आगामी आंदोलन की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही राज्यस्तरीय कार्यकारिणी समिति का गठन किया गया।
बैठक में शशि पन्ना और लक्ष्मीनारायण मुंडा को मोर्चा का मुख्य प्रवक्ता बनाया गया। राज्यस्तरीय कार्यकारिणी में रांची से दयामनी बारला, रमा खलखो, लक्ष्मीनारायण मुंडा, अजय तिर्की, शशि पन्ना, ज्योत्सना केरकेट्टा, वासवी किड़ो, आलोक कुजूर, नीरज भोगता, अनिल अमिताभ पन्ना, शिव कच्छप और अनिल उरांव को शामिल किया गया।
खूंटी से दामु मुंडा, चंद्र प्रभात मुंडा, एलिस्टर बोदरा, मार्शल बारला, बिनसय मुंडा, शिबू होरो और बसंत सुरीन; गुमला से अल्बर्ट तिग्गा, सेथ कुमार एक्का, मेरी लकड़ा और तूपेन्द्र भगत; लोहरदगा से संगीता उरांव, सीनियरों उरांव और सरिता भगत तथा सिमडेगा से अनुप लकड़ा, सुनील मिंज, डेविड तिर्की और रोहन तिर्की को कार्यकारिणी में शामिल किया गया है। इसके अलावा हजारीबाग, चतरा, रामगढ़, गढ़वा, पलामू, लातेहार, चाईबासा, जमशेदपुर, सरायकेला-खरसावां, बोकारो, दुमका, जामताड़ा, देवघर, पाकुड़ और गिरिडीह के लिए भी कार्यकारिणी सदस्यों की घोषणा की गई।
इस अवसर पर बंधु तिर्की ने कहा कि राज्यों में प्रस्तावित परिसीमन आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने कहा कि परिसीमन के मुद्दे पर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाते हुए लोकतांत्रिक आंदोलन को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। मोर्चा की ओर से पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों की विशेष संवैधानिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक प्रतिनिधित्व की रक्षा और परिसीमन के संभावित प्रभावों को लेकर आवश्यक संवैधानिक पहल की मांग उठाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि दशहरा के बाद सभी जिलों में बैठकें आयोजित की जाएंगी। इसके माध्यम से संगठन को ग्राम और प्रखंड स्तर तक मजबूत करने के साथ परिसीमन समेत अन्य आदिवासी मुद्दों पर आगामी आंदोलन और कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा तैयार की जाएगी। बैठक में मोर्चा के कई सदस्य और कार्यकर्ता मौजूद रहे।————-
