देवघर, 03 अक्टूबर । बाबा नगरी देवघर में सीसीडीएसआई एनुअल कांफ्रेंस 2026 का दो दिवसीय भव्य आयोजन मेहर गार्डन में शनिवार को किया गया। सम्मेलन के अंतिम दिन देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे चिकित्सकों और चिकित्सा विशेषज्ञों ने मधुमेह, उससे होने वाली जटिलताओं और मधुमेह के कारण किडनी पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर विस्तार से मंथन किया। विशेषज्ञों ने अपने अनुभवों के साथ आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों और नवीनतम वैज्ञानिक जानकारी साझा की।
सम्मेलन में डायबिटिक किडनी डिजीज की रोकथाम, शुरुआती पहचान और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर विशेष चर्चा हुई। चिकित्सकों ने कहा कि बदलती जीवनशैली के कारण मधुमेह के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में नियमित स्वास्थ्य जांच, बीमारी की समय पर पहचान और उचित चिकित्सकीय निगरानी बेहद महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रीय स्तर के इस चिकित्सा सम्मेलन में देवघर के चिकित्सक डॉ आरके झा ने सक्रिय भागीदारी की। उन्होंने डायबिटीज एंड किडनी डिजीज विषय पर अपने चिकित्सकीय अनुभव और विचार प्रस्तुत किए।
डॉ आरके झा ने एमबीबीएस (केईएम एवं जीएसएमसी, मुंबई) और एमडी (पीएमसीएच, पटना) की शिक्षा प्राप्त की है। वे डिपार्टमेंट ऑफ नेफ्रोलॉजी, आईजीआईएमएस, पटना में वरिष्ठ रेजिडेंट के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
मौके पर डॉ झा ने कहा कि मधुमेह से पीड़ित मरीजों में किडनी की बीमारी की समय रहते पहचान करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने नियमित रूप से यूरिन एल्ब्यूमिन, किडनी फंक्शन और ब्लड प्रेशर की जांच कराने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि आधुनिक उपचार और समय पर चिकित्सकीय निगरानी से किडनी की बीमारी की प्रगति को धीमा करने और गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि मधुमेह का उपचार केवल ब्लड शुगर को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। मरीज की किडनी, हृदय और हृदय संबंधी जोखिमों को ध्यान में रखते हुए समग्र उपचार की आवश्यकता है।
सम्मेलन में विशेषज्ञों ने समय पर जांच, बचाव, चिकित्सकों के बीच बेहतर समन्वय और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित उपचार को मधुमेह और किडनी रोगों से निपटने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
