जमशेदपुर गोलीकांड पर बाबूलाल मरांडी ने सरकार को घेरा, कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल

रांची, 27 सितंबर । जमशेदपुर के बिंदल मॉल स्थित उडुपी रेस्टोरेंट में दिनदहाड़े हुई गोलीबारी में चार लोगों के घायल होने की घटना को लेकर झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इस घटना ने एक बार फिर राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आपराधिक घटनाओं के लगातार सामने आने से आम लोगों में भय का माहौल है और यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि झारखंड में आम आदमी आखिर कहां सुरक्षित है।

मरांडी ने रविवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर कहा कि पहले धनबाद में होने वाली आपराधिक घटनाओं को लेकर चर्चा होती थी, लेकिन अब राज्य के दूसरे प्रमुख शहर भी इस तरह की घटनाओं से अछूते नहीं हैं। दिनदहाड़े गोलीबारी की घटना को लेकर उन्होंने सरकार से कानून-व्यवस्था की स्थिति पर जवाब मांगा।

भाजपा नेता ने पुलिस विभाग में अधिकारियों की पोस्टिंग और जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर भी राज्य की हेमंत सोरेन सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस के महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति में योग्यता और अनुभव के बजाय सत्ता के प्रति वफादारी को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था से पुलिस की निष्पक्षता और जवाबदेही पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

बाबूलाल मरांडी ने नीरज सिन्हा के बाद अनुराग गुप्ता और तदाशा मिश्रा जैसे अधिकारियों को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) बनाए जाने का उल्लेख करते हुए पुलिस के शीर्ष पदों पर नियुक्तियों को लेकर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने सेवानिवृत्त अधिकारियों को पुलिस के शीर्ष पदों पर जिम्मेदारी दिए जाने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया।

नेता प्रतिपक्ष ने वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार दिए जाने का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री से पूछा कि एडीजी स्तर के अधिकारी मनोज कौशिक के पास रांची जोनल आईजी का अतिरिक्त प्रभार क्यों है और रांची में डीआईजी का पद रिक्त रखने का क्या कारण है। उन्होंने मयूर पटेल को दुमका आईजी का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने के औचित्य पर भी सवाल उठाया।

मरांडी ने कहा कि पुलिस विभाग में अतिरिक्त प्रभार देने का आधार सरकार को सार्वजनिक करना चाहिए। उन्होंने सीआईडी में वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों को महत्वपूर्ण मामलों की जांच की जिम्मेदारी सौंपने की मांग की। साथ ही मयूर पटेल और संजीव कुमार के पूर्व पदस्थापन के दौरान कोयला तस्करी से जुड़े आरोपों का उल्लेख करते हुए उन्होंने पूछा कि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच क्यों नहीं कराई गई।

भाजपा नेता ने राकेश बंसल के लंबे समय तक पदस्थापन की प्रतीक्षा में रहने और माइकल राज जैसे अनुभवी अधिकारियों की जिम्मेदारियों को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। मरांडी ने कहा कि अपराध की घटना के बाद अधिकारियों को घटनास्थल पर भेजना पर्याप्त नहीं है। अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए पुलिस पदस्थापन में योग्यता, अनुभव, ईमानदारी और जवाबदेही को प्राथमिकता देना जरूरी है।