अष्टछाप कवियों के पदों ने बांधा भक्ति और संगीत का अलौकिक समां
बीकानेर, 6 सितंबर। हवेली संगीत की समृद्ध परंपरा, भक्ति की भावधारा और सुरों की मधुर लहरियों से शनिवार शाम श्री मदन मोहन मंदिर प्रांगण गूंज उठा। हवेली संगीत को समर्पित श्री मदन मोहन संगीतालय का वार्षिक उत्सव श्रद्धा, उल्लास और संगीत की अनुपम छटा के बीच मनाया गया। जैसे-जैसे अष्टछाप कवियों के पदों के स्वर वातावरण में घुले, पूरा परिसर भक्तिरस में डूबता चला गया।
नत्थूसर गेट के बाहर स्थित मूंधड़ा बगीची में आयोजित समारोह में संगीतालय के 7 से 25 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थियों ने अष्टछाप कवियों द्वारा रचित भजनों एवं पदों को हवेली संगीत की पारंपरिक शैली में प्रस्तुत किया। बाल एवं युवा कलाकारों के कंठ से निकली सुरमयी प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। कभी मधुर आलाप ने वातावरण को आध्यात्मिक बनाया तो कभी भजनों की लय पर पूरा प्रांगण भक्तिभाव से झूम उठा।
इस अवसर पर सिंपलेक्स इंफ्रा के एमिरेट्स अध्यक्ष श्री विट्ठल दास मूंधड़ा ने हवेली संगीत की महत्ता और अष्टछाप कवियों के पदों एवं हवेली संगीत साधना पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हवेली संगीत केवल गायन की एक विधा नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध भक्ति और सांस्कृतिक परंपरा की जीवंत धरोहर है। संगीतालय में इसकी शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थी आने वाले समय में हवेली संगीत को देशभर में नए सिरे से प्रतिष्ठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को आशीर्वाद देते हुए उनकी संगीत साधना की सराहना की।
कार्यक्रम में यात्विक श्रीमाली, माधव श्रीमाली, आकांक्षा व्यास, अंजलि प्रजापत, चंचल किराडू, पूर्वी ओझा, रामकुमार पारीक, राघव स्वामी, योगेश पुरोहित, धनाक्षी तिवारी एवं युवी जोशी ने संगीत गुरु नारायण दास रंगा के निर्देशन में एक से बढ़कर एक सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में सुर, ताल और भाव का ऐसा सुंदर संगम देखने को मिला कि श्रोता देर तक मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे।
संगत में मृदंग पर धीरज पुरोहित तथा झांझ पर भागीरथ कच्छावा ने अपनी कला से प्रस्तुतियों को और अधिक प्रभावशाली बना दिया। मृदंग की थाप और झांझ की झंकार के साथ जब भक्ति के स्वर गूंजे तो वातावरण मानो वृंदावन की भक्तिमय गलियों का सजीव रूप बन गया।
कार्यक्रम का संचालन दामोदर तंवर ने किया।
