रांची 27 अगस्त । झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य के डीजीपी को कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं होने पर अवमानना नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उनसे पूछा है कि कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं होने पर उनपर क्यों नहीं अवमानना की कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने डीजीपी को शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।
कोर्ट ने डीजीपी से पूछा है कि कोर्ट के आदेश के अनुपालन को लेकर झारखंड के पुलिस थानों में सीसीटीवी क्यों इंस्टॉल नहीं किया जा रहा है। कोर्ट ने सरकार को राज्य के पुलिस थानों में 4 सप्ताह में सीसीटीवी लगाने का निर्देश दिया है। सीसीटीवी इंस्टॉलशन के संबंध में मुख्य सचिव और गृह सचिव को अनुपालन रिपोर्ट 30 सितंबर तक पेश करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने कहा कि मुख्य सचिव और गृह सचिव कोर्ट के आदेश को गंभीरता से लें। वहीं, डीजीपी को भी कोर्ट के आदेश को गंभीरता से लेने की हिदायत दें। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जे एल के एम) के प्रत्याशी रह चुके तरुण महतो की पुलिस कस्टडी में पिटाई से संबंधित कोर्ट के स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई की।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सरायकेला एसपी को बताने को कहा था कि उनके जिले में पुलिस थानों में सीसीटीवी लगाने के संबंध में क्या कार्रवाई हुई? कोर्ट ने मामले में प्रधान सचिव हेल्थ से भी पूछा था कि जिस मेडिकल ऑफिसर ने तरुण महतो को कोर्ट में पेश करने के समय फिट फॉर कस्टडी का सर्टिफिकेट दिया था, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 के चुनाव में तरुण महतो झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के इचागढ़ प्रत्याशी रह चुके हैं। 19 नवंबर 2025 की रात इचागढ़ पुलिस उन्हें पड़कर थाने ले गई, जहां हिरासत में उनकी बर्बरता से पिटाई की गई थी।
इचागढ़ पुलिस की ओर से उन्हें थर्ड डिग्री टॉर्चर भी किया गया था। इसको लेकर उनकी पत्नी की ओर से हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को एक पत्र लिखा गया था। इस पर कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था। मामले में पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने एसपी सरायकेला को दस्तावेज के साथ बुलाया भी था।
