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कोलकाता, 18 अगस्त। कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में जाति प्रमाणपत्रों के पुनः सत्यापन से संबंधित राज्य सरकार की 14 मई की अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया।

राज्य सरकार ने वर्ष 2011 से जारी किए गए करीब 1.69 करोड़ जाति प्रमाणपत्रों के दोबारा सत्यापन के लिए 14 मई को अधिसूचना जारी की थी। सरकार की ओर से आशंका जताई गई थी कि ‘दुआरे सरकार’ योजना के माध्यम से जारी किए गए जाति प्रमाणपत्रों में बड़ी संख्या में प्रमाणपत्र फर्जी हो सकते हैं। इसी आधार पर सभी प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच की प्रक्रिया शुरू की गई थी।

हालांकि, याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार की इस अधिसूचना को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का रुख किया था। याचिका में सवाल उठाया गया कि किसी विशेष शिकायत या आरोप के आधार पर प्रमाणपत्र की जांच का प्रावधान कानून में मौजूद है, लेकिन किसी निश्चित अवधि के दौरान जारी किए गए सभी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रमाणपत्रों का व्यापक स्तर पर पुनः सत्यापन किस आधार पर किया जा रहा है।

मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट की खंडपीठ ने 14 मई की अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी। अदालत के इस आदेश से राज्य में जारी जाति प्रमाणपत्रों के व्यापक पुनः सत्यापन की प्रक्रिया फिलहाल प्रभावित होगी।