कारो नदी में ऊफान , जनजीवन बेहाल

कारो नदी उफान पर, पुल डूबा , सारंडा में कच्चा मकान क्षतिग्रस्त, राहत की मांग तेज

रांची/पश्चिमी सिंहभूम, 28 जुलाई। झारखंड में मानसून अब भी सामान्य रफ्तार नहीं पकड़ पाया है। एक ओर पूरे राज्य में अब तक सामान्य से 27 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है, वहीं पश्चिमी सिंहभूम जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। भारी वर्षा से कारो नदी उफान पर है, कई क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं तथा सारंडा क्षेत्र में एक कच्चा मकान भी क्षतिग्रस्त हो गया।

मौसम विभाग के अनुसार, एक जून से 28 जुलाई तक राज्य में सामान्य 478.3 मिलीमीटर वर्षा के मुकाबले केवल 352.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 27 प्रतिशत कम है। 24 जिलों में केवल पश्चिमी सिंहभूम ऐसा जिला है, जहां सामान्य से अधिक वर्षा हुई है। यहां सामान्य 461.9 मिलीमीटर के मुकाबले 534 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 16 प्रतिशत अधिक है। इसके बाद सरायकेला-खरसावां में सामान्य से केवल एक प्रतिशत कम वर्षा हुई। पूर्वी सिंहभूम, रांची और रामगढ़ में भी अपेक्षाकृत बेहतर वर्षा दर्ज की गई, जबकि अधिकांश जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से काफी कम बना हुआ है।

मौसम विभाग ने बताया कि झारखंड में पूरे मानसून सीजन के दौरान औसतन लगभग 1,200 मिलीमीटर वर्षा होती है, लेकिन अब तक इसका लगभग एक-तिहाई ही रिकॉर्ड किया गया है। पिछले 24 घंटों में सबसे अधिक 167.2 मिलीमीटर वर्षा पश्चिमी सिंहभूम के मंझारी में दर्ज की गई। वहीं, सर्वाधिक तापमान बोकारो में 33.1 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान लातेहार में 21.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

राजधानी रांची सहित आसपास के क्षेत्रों में मंगलवार को दिनभर रुक-रुक कर बारिश होती रही। इससे लोगों को आवागमन और दैनिक कार्यों में परेशानी हुई, हालांकि मौसम सुहावना होने से उमस से राहत मिली।

 

उधर, पश्चिमी सिंहभूम जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से हालात गंभीर हो गए हैं। गुवा, सारंडा, बड़ाजामदा, किरीबुरू और आसपास के क्षेत्रों में नदियां उफान पर हैं तथा कई निचले इलाकों में जलभराव से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं।

गुवा के बोकना स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर के समीप कारो नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से पुल के ऊपर लगभग चार फीट पानी बहने लगा। पुल पूरी तरह जलमग्न होने के कारण गुवा-बड़ाजामदा-किरीबुरू-चाईबासा मार्ग पर आवागमन ठप हो गया। कई यात्री घंटों तक पानी उतरने का इंतजार करते रहे, जबकि आवश्यक कार्य से निकलने वालों को लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ा।

बड़ाजामदा के मिडिल स्कूल, फुटबॉल मैदान और आसपास की बस्तियों में भी पानी भर जाने से बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। कई घरों में पानी घुसने से लोग घरेलू सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे रहे। करमपदा, छोटानागरा, गंगदा सहित सारंडा के कई गांवों में भी जलभराव से जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर तेज हवा के कारण पेड़ गिरने से यातायात बाधित रहा।

इसी बीच सारंडा क्षेत्र के छोटानागरा पंचायत के दुबिल गांव में लगातार बारिश के कारण रूइदास आईन्द का कच्चा मिट्टी का मकान क्षतिग्रस्त हो गया। मकान की एक पूरी दीवार भरभराकर गिर गई। घटना के समय परिवार के सभी सदस्य घर में मौजूद थे, लेकिन संयोगवश कोई हताहत नहीं हुआ।

परिवार का कहना है कि लगातार बारिश से मकान की अन्य दीवारें भी कमजोर हो चुकी हैं और कभी भी गिर सकती हैं। मजबूरी में पूरा परिवार उसी क्षतिग्रस्त मकान में रहने को विवश है। दीवार गिरने से घर खुला होने के कारण सांप, बिच्छू और अन्य विषैले जीव-जंतुओं के प्रवेश का भी खतरा बढ़ गया है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि हर वर्ष बरसात के दौरान कारो नदी का जलस्तर बढ़ने से बोकना पुल डूब जाता है और सारंडा-बड़ाजामदा क्षेत्र में जलभराव की समस्या गंभीर रूप ले लेती है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से राहत एवं बचाव कार्य तेज करने, जल निकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने, पीड़ित परिवार को तत्काल राहत सामग्री, सुरक्षित आवास तथा क्षतिग्रस्त मकान का सर्वे कर उचित मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है।