पासपोर्ट गुम होने के बाद नौकरी गई,
केंद्र व राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग
गिरडीह , 4 जुलाई । गिरिडीह जिले के बगोदर थाना क्षेत्र के तिरला निवासी प्रवासी मजदूर लालचंद महतो दुबई में बेहद खराब परिस्थितियों में फंस गया है। हालात ऐसे हैं कि उनके पास खाने तक के पैसे नहीं बचे हैं और वे किसी तरह अपना गुजारा कर रहे हैं।
लालचंद महतो की पत्नी ने सरकार से पति की सुरक्षित स्वदेश वापसी की गुहार लगाई है। उन्होंने बताया कि लालचंद रोजगार की तलाश में दुबई गए थे, जहां वे कारपेंटर (बढ़ई) का काम कर रहे थे। इसी दौरान उनका पासपोर्ट गुम हो गया, जिसके बाद उन्हें प्रशासनिक और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा। पासपोर्ट नहीं होने के कारण कंपनी ने उन्हें नौकरी से भी हटा दिया। अब वे बिना रोजगार और जरूरी दस्तावेजों के दुबई में फंसे हुए हैं तथा भारत लौटना चाहते हैं, लेकिन आवश्यक प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण उनकी वापसी संभव नहीं हो पा रही है।
पत्नी ने बताया कि परिवार पहले से ही आर्थिक संकट से गुजर रहा है। उनके ससुर दशरथ महतो वर्ष 2013 से मुंबई से लापता हैं, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति और अधिक कमजोर हो गई है। ऐसे में पति के विदेश में फंस जाने से परिवार पर संकट और गहरा गया है।
सामाजिक कार्यकर्ता ने सरकार से की हस्तक्षेप की मांग
प्रवासी श्रमिकों के मुद्दों पर काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली ने केंद्र और झारखंड सरकार से लालचंद महतो की सुरक्षित वतन वापसी सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह कोई पहला मामला नहीं है। अधिक कमाई की उम्मीद में विदेश जाने वाले कई मजदूर वहां फंस चुके हैं, जबकि कई की मौत भी हो चुकी है। ऐसे मामलों में काफी प्रयास के बाद ही मजदूरों की स्वदेश वापसी या शव भारत लाए जा सके हैं।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में गिरिडीह जिले के द्वारका महतो और बोकारो जिले के सत्येंद्र महतो का शव सऊदी अरब में पड़ा हुआ है। वहीं, गिरिडीह के बगोदर निवासी महेंद्र महतो सऊदी अरब में फंसे हैं और डुमरी के हुलास महतो दुबई की जेल में बंद हैं।
सिकंदर अली ने कहा कि लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों के बावजूद लोग विदेश जाने से पहले पर्याप्त जानकारी और सावधानी नहीं बरत रहे हैं। उन्होंने सरकार से राज्य में रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की मांग करते हुए कहा कि पलायन रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन ही सबसे प्रभावी उपाय है।
