नीलाम्बर पिताम्बरपुर, 20 अगस्त। मानव (श्रमिक) तस्करों के झांसे में फंसकर पलामू जिले के लेस्लीगंज थाना क्षेत्र के शाहद गांव के 40 से 50 श्रमिकों को कर्नाटक में बंधक बनाए जाने का आरोप सामने आया है। पीड़ितों के परिजनों ने लेस्लीगंज थाना, जिला श्रम अधीक्षक अमित कुमार चौधरी, प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग और माले विधायक बिनोद सिंह को आवेदन देकर सभी श्रमिकों को मुक्त कराने की गुहार लगाई है।
बताया गया कि शाहद गांव के अनुसूचित जाति भुइँया समुदाय के इन श्रमिकों में बाल श्रमिक, किशोरवय लड़कियां तथा अधेड़ महिला-पुरुष शामिल हैं। आरोप है कि शाहद गांव की लक्ष्मी कुमारी और पाटन के डिक्की सिंह ने मध्यप्रदेश के जबलपुर में भवन निर्माण कार्य और प्रतिदिन 600 रुपये मजदूरी का झांसा देकर करीब एक माह पहले इन्हें वहां ले जाने की बात कही, लेकिन जबलपुर के बजाय कर्नाटक के मरचाकनहैली स्थित बसवेगोड़ा पहुंचाकर गन्ना काटने, छीलने और ट्रैक्टर-ट्रॉली में लोडिंग के काम में लगा दिया।
श्रमिक अंकज कुमार भुइँया, ओमप्रकाश कुमार, किरण कुँअर, उषा देवी, दुर्गा भुइँया, आयुष कुमार, बजरंगी कुमार, बंटी कुमार, भीमल भुइँया, सुशीला देवी, राहुल कुमार, छोटन कुमार, कविता कुमारी, संजय भुइँया, सुरति कुमारी, विजय कुमार, अंजली कुमारी, पूजा कुमारी, सुषमा कुमारी और चनका कुमारी सहित अन्य के परिजनों का आरोप है कि उनसे सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक काम कराया जा रहा है। बीमार होने या 12 घंटे काम करने में असमर्थता जताने पर मारपीट करने का भी आरोप लगाया गया है। श्रमिकों को खेत में टेंट लगाकर रखा गया है और रात में पहरा दिया जाता है। घर लौटने के लिए 25 हजार रुपये मंगाने की बात कही जा रही है।
ठेकेदार डिक्की सिंह ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि सभी श्रमिक काम कर रहे हैं। थाना प्रभारी उत्तम कुमार राय ने बताया कि श्रमिकों को ले जाने वाली लक्ष्मी कुमारी से बात की गई है। उसके अनुसार प्रति व्यक्ति 2200 रुपये खर्च हुए हैं और जो जाना चाहे, पैसा देकर घर जा सकता है। उन्होंने परिजनों के इच्छुक होने पर पुलिस अधिकारियों को भेजने की बात कही। वहीं प्रवासी श्रमिक कल्याण बोर्ड की सुश्री शिखा ने बताया कि श्रमिक बेंगलुरु से करीब 300 किलोमीटर दूर हैं, स्थानीय थाने से संपर्क किया जा रहा है और संभवतः एक-दो दिनों में सभी को मुक्त करा लिया जाएगा।
